Temple Land Protection Movement : राजस्वमन्त्री चन्द्रशेखर बावनकुळे की घोषणा : ‘देवस्थान इनाम उन्मूलन प्रारूप अधिनियम २०२६’ को स्थगिती !

यह निर्णय अर्थात सभी मन्दिर विश्वस्त एवं समस्त हिन्दुत्ववादी संगठनों के संगठित संघर्ष तथा प्रयत्नों को मिली बडी सफलता है, ऐसी जानकारी महाराष्ट्र मन्दिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठक श्री. सुनील घनवट ने प्रसिद्धिपत्रक द्वारा दी ।

मृतक के नाम पर अभियोग चलाकर मंदिर प्रशासन के विरुद्ध अचलपुर के तहसीलदार के द्वारा दिया गया आदेश न्यायालय ने किया निरस्त ।

‘श्री दत्तात्रय संस्थान, नायगांव’की संपत्ति के संबंध में मिली कानूनी विजय ।
महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के प्रयासों को मिली सफलता ।

महाराष्ट्र में २ जून से आंदोलन, घंटानाद, महाआरती एवं हस्ताक्षर अभियान आरंभ होगा ।

मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय समन्वयक श्री सुनील घनवट ने कहा कि “यह लडाई मंदिरों की अस्मिता की है” एवं २ जून को विभागीय आयुक्तों को ज्ञापन देकर राज्यभर में आंदोलनों का प्रारंभ किया जाएगा, सरकार के प्रति ऐसी चेतावनी भी दी ।

छत्रपती के मंदिर के लिए प्राप्त होनेवाला अनुदान क्रूरकर्मा औरंगजेब की कब्र की देखभाल के लिए दिए जा रहे अनुदान की तुलना में अत्यल्प !

औरंगजेब की कब्र की देखभाल के लिए प्रति वर्ष २,५५,१६० रुपये (वर्ष २०२२-२३ ) दिए जा रहे हैं, इसके विरुद्ध छत्रपती शिवाजी महाराज के ‘श्री शिवराजेश्वर मंदिर’ के लिए मात्र १ लाख रुपये दिए जा रहे हैं ।

देवस्थान इनाम निर्मूलन प्रारूप के विरोध में मुख्यमंत्री से लेकर तहसीलदारों तक ३०० से अधिक निवेदन !

‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन प्रारूप अधिनियम’ के विरोध में राज्य के सहस्रों मंदिर हुए एकत्रित !
हिन्दू मंदिरों की भूमि अधिगृहीत करने की शासकीय नीति के विरोध में तीव्र असंतोष !

हिन्दू देवस्थानों के अस्तित्व पर आघात करने वाले ‘इनाम उन्मूलन अधिनियम’ को तत्काल वापस लें, अन्यथा जनआंदोलन करेंगे !

ऐसी चेतावनी क्यों देनी पडती है ? प्रशासन स्वयं संज्ञान लेकर कार्रवाई क्यों नहीं करता ?

देवस्थान इनाम निर्मूलन अधिनियम के विषय में राजस्व मंत्री (महसूलमंत्री) की उपस्थिति में मंदिर ट्रस्टियों की बैठक लें ।

राज्य के राजस्व विभाग द्वारा ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन अधिनियम’ की रूपरेखा प्रसारित की गई है तथा इस विषय में सुझाव तथा आपत्तियां मांगी गई हैं ।

महाराष्ट्र मंदिर महासंघ : मंदिर-संस्कृति की रक्षा हेतु कार्यरत संगठन !

छत्रपति शिवाजी महाराज एवं राजमाता अहिल्यादेवी होळकर ने मंदिरों की रक्षा की, साथ ही विदेशी आक्रांताओं द्वारा ध्वस्त किए मंदिरों का जीर्णाेद्धार भी किया । इससे मंदिरों का महत्त्व ध्यान में आता है; परंतु भारत द्वारा ‘सेक्युलर’ तंत्र अपनाए जाने के कारण मंदिरों पर नई-नई पद्धतियों से आघात हो रहे हैं ।

Sanatan Sanstha Press Meet : भारत की रक्षा हेतु मुंबई में १७ मई को ‘ श्री राजमातंगी महायज्ञ ’ !

संपूर्ण विश्व पर वर्तमान में तृतीय विश्वयुद्ध के काले बादल मंडरा रहे हैं । ऐसी स्थिति में केवल राजनीतिक अथवा बौद्धिक स्तर के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं । राष्ट्र को आध्यात्मिक अधिष्ठान की महती आवश्यकता है ।

राष्ट्रगुरु समर्थ रामदासस्वामी सहित राष्ट्रपुरुषों का अनादर करनेवालों पर अपराध पंजीकृत करें ।

इस ज्ञापन में आगे कहा गया है कि श्रीसमर्थ रामदासस्वामी जी ने समाज में देवता, देश एवं धर्म के प्रति निष्ठा बढाने के लिए लोकोत्तर पद्धति का कार्य किया ।