हिन्दू देवस्थानों के अस्तित्व पर आघात करने वाले ‘इनाम उन्मूलन अधिनियम’ को तत्काल वापस लें, अन्यथा जनआंदोलन करेंगे !

ऐसी चेतावनी क्यों देनी पडती है ? प्रशासन स्वयं संज्ञान लेकर कार्रवाई क्यों नहीं करता ?

देवस्थान इनाम निर्मूलन अधिनियम के विषय में राजस्व मंत्री (महसूलमंत्री) की उपस्थिति में मंदिर ट्रस्टियों की बैठक लें ।

राज्य के राजस्व विभाग द्वारा ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन अधिनियम’ की रूपरेखा प्रसारित की गई है तथा इस विषय में सुझाव तथा आपत्तियां मांगी गई हैं ।

महाराष्ट्र मंदिर महासंघ : मंदिर-संस्कृति की रक्षा हेतु कार्यरत संगठन !

छत्रपति शिवाजी महाराज एवं राजमाता अहिल्यादेवी होळकर ने मंदिरों की रक्षा की, साथ ही विदेशी आक्रांताओं द्वारा ध्वस्त किए मंदिरों का जीर्णाेद्धार भी किया । इससे मंदिरों का महत्त्व ध्यान में आता है; परंतु भारत द्वारा ‘सेक्युलर’ तंत्र अपनाए जाने के कारण मंदिरों पर नई-नई पद्धतियों से आघात हो रहे हैं ।

Sanatan Sanstha Press Meet : भारत की रक्षा हेतु मुंबई में १७ मई को ‘ श्री राजमातंगी महायज्ञ ’ !

संपूर्ण विश्व पर वर्तमान में तृतीय विश्वयुद्ध के काले बादल मंडरा रहे हैं । ऐसी स्थिति में केवल राजनीतिक अथवा बौद्धिक स्तर के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं । राष्ट्र को आध्यात्मिक अधिष्ठान की महती आवश्यकता है ।

राष्ट्रगुरु समर्थ रामदासस्वामी सहित राष्ट्रपुरुषों का अनादर करनेवालों पर अपराध पंजीकृत करें ।

इस ज्ञापन में आगे कहा गया है कि श्रीसमर्थ रामदासस्वामी जी ने समाज में देवता, देश एवं धर्म के प्रति निष्ठा बढाने के लिए लोकोत्तर पद्धति का कार्य किया ।

सारसबाग को ‘शाहीनबाग’ नहीं होने देंगे – हिन्दुत्वनिष्ठों का निश्चय

समस्त पुणेवासियों का आस्था का केंद्र, साथ ही ऐतिहासिक एवं धार्मिकदृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जानेवाला सारसबाग तथा उसमें स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर परिसर की पवित्रता बनाए रखने की मांग को लेकर सारसबाग के पदपथ पर हिन्दुत्वनिष्ठों ने तीव्र आंदोलन किया ।

आगामी अधिवेशन में मंदिरों की भूमि से संबंधित अधिनियम लाया जाएगा ! – चंद्रशेखर बावनकुळे, राजस्व मंत्री

जुलाई मास में यह अधिनियम पूर्णतः लागू हो जाएगा । महाराष्ट्र के साढे चार लाख मंदिरों की भूमि के हस्तांतरण से संबंधित यह अधिनियम है । रत्नागिरी जिले के चिपळूण तहसील के ऐतिहासिक पेढे परशुराम देवस्थान के संदर्भ में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे के कक्ष में संपन्न हुई बैठक में उन्होंने यह जानकारी दी ।

मंदिरों के संरक्षण एवं सुव्यवस्था के लिए ‘मंदिर महासंघ छत्तीसगढ’ की स्थापना l

महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक आदि राज्यों में मंदिरों का प्रभावी संगठन निर्माण करने के उपरांत अब छत्तीसगढ राज्य में भी मंदिर महासंघ की स्थापना की गई है । अक्षय तृतीया के पवित्र मुहूर्त पर १९ अप्रैल २०२६ को मंदिर महासंघ की औपचारिक स्थापना की जाएगी ।

मंदिरों में ‘सशुल्क दर्शन सेवा’ की सुविधा बंद करें तथा देवस्थानों में राजनीतिक नियुक्तियां न हों ! – सुनील घनवट, राष्ट्रीय संगठक, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ

‘विश्वस्त’ (ट्रस्टी) के रूप में श्रद्धालु की नियुक्ति करने की मांग !

महाराष्ट्र में कार्यरत पुजारियों को सुनिश्चित मानदेय तथा कानूनी संरक्षण देनेवाली नीति तैयार की जाएगी ।

राज्य के विभिन्न मंदिरों में पीढियों से सेवा दे रहे पुजारियों को आर्थिक स्थिरता प्रदान करने के लिए तथा उन्हें संरक्षण देने के लिए सरकार बहुत शीघ्र एक सर्वसमावेशी नीति की घोषणा करेगी ।