‘मंदिर सुव्यवस्थापन’ परिसंवाद में न्यासियों की भावना !

ओजर, ३ दिसंबर (समाचार) – मंदिरों के न्यासियों को ‘न्यासी’ पद भूलकर सामान्य भक्त के रूप में भगवान की सेवा करनी चाहिए । ‘भक्त’ होकर मंदिर का व्यवस्थापन देखने से मंदिर की कीर्ति दूर-दूर तक फैलेगी । धर्म, भक्त एवं देवताओं का हित ध्यान में लेकर मंदिरों का व्यवस्थापन देखना चाहिए, ‘मंदिर के सुव्यस्थापन’ परिसंवाद में मान्यवरों ने ऐसा मत व्यक्त किया । महाराष्ट्र मंदिर-न्यास परिषद में २ दिसंबर को आयोजित किए गए परिसंवाद में भूतपूर्व धर्मादाय आयुक्त श्री. दिलीप देशमुख, अमलनेर के श्री मंगलग्रह मंदिर के न्यासी श्री. डिगंबर महाले, ओजर के विघ्नहर गणपति मंदिर के व्यवस्थापक श्री. अशोक घेगडे, सनातन संस्था के धर्मप्रचारक सद्गुरु नंदकुमार जाधव सहभागी हुए थे । हिन्दू जनजागृति समिति के समन्वयक श्री. आनंद जाखोटिया ने इस संवाद का सूत्र संचालन किया ।

इस समय श्री. डिगंबर ने आगे कहा, ‘‘पूजारी एवं भक्त मंदिर के आत्मा हैं । पुजारियों की धार्मिक वृत्ति के कारण भक्त दिव्यता की अनुभूति ले सकेंगे ।
पुजारी जितने तन्मयता से वर्तन करते हैं, समझाकर कहते हैं, उसी मात्रा में आनेवाले भक्तों को दिव्य अनुभूतियां होती हैं । इसलिए पुरोहितों की भूमिका महत्त्वपूर्ण है । न्यासियों को अहंकार भूलकर काम करना चाहिए । पुजारी एवं न्यासियों को आपस के मनमुटाव टालने चाहिए । पद का मान-सम्मान भूलकर न्यासियों को भक्तों के साथ नम्रतापूर्वक व्यवहार करना चाहिए । स्वच्छता, नम्रता एवं पारदर्शिता, न्यासियों को इस त्रिसूत्री का पालन करना चाहिए । इस कारण मंदिर में आने पर भक्त आत्मानुभूति ले सकेंगे ।’’
(सौजन्य : Hindu Janajagruti Samiti)
मंदिर में आनेवालें भक्तों को संतोष मिलना चाहिए ! – सद्गुरु नंदकुमार जाधव, धर्मप्रचारक, सनातन संस्था

सद्गुरु नंदकुमार ने कहा, ‘‘मंदिर में आत्मानुभूति होने के लिए भक्त मंदिर में आते हैं । न्यासियों को भक्तों का अधिकाधिक विचार करना चाहिए । गरमी के दिनों में भक्तों के पांव में जलन न हों, इसकी चिंता न्यासियों को करनी चाहिए । मंदिर में आनेवालें भक्तों को संतोष मिलना चाहिए ।’’
न्यासियों को मंदिर व्यवस्थापन के विषय में भक्तों का मत समझना चाहिए ! – श्री. अशोक घेगडे, न्यासी, विघ्नहर गणपति मंदिर
श्री. अशोक घेगडे ने कहा, ‘‘सामान्य भक्त होकर उनसे मिलजुलकर न्यासियों को मंदिर व्यवस्थापना के विषय में भक्तों का मत समझना चाहिए । इससे ‘न्यासियों का कार्य कैसे चल रहा है ?’, यह भक्तों के ध्यान में आएगा । मंदिर की निधि विकास कामों के लिए नहीं, अपितु मंदिर क्षेत्र स्वच्छ रखने के लिए किया जाना चाहिए ।’’
दर्शन के लिए पंक्ति में खडे हुए वृद्ध, गर्भवती महिलाएं आदि के लिए सीधे दर्शन की व्यवस्था करनी चाहिए ! – दिलीप देशमुख, भूतपूर्व धर्मादाय आयुक्त
‘न्यासियों को एक साथ भक्तों की भांति पंक्ति में खडे रहकर भगवान के दर्शन लेना चाहिए । इससे भक्तों को हो रहे कष्ट उनके ध्यान में आएंगे । पंक्ति में वृद्ध, गर्भवती महिलाएं, नवविवाहित दंपति यदि हों, तो उनको सीधे दर्शन की व्यवस्था करनी चाहिए ।
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