
रामनाथ देवस्थान – धर्माचरण एवं आध्यात्मिक साधना करने से हिन्दू धर्म की श्रेष्ठता समझ में आती है तथा तब हम में सच्चा धर्माभिमान निर्माण होता है । उसके उपरांत समाज, राष्ट्र एवं धर्म का सच्चा हित साधने का प्रयास किया जाता है । धर्माचरण एवं आध्यात्मिक साधना करने से व्यक्ति पवित्र बन जाता है । धर्माभिमानी व्यक्ति धर्म का अनादर नहीं करता तथा अन्यों को भी वैसा करने नहीं देता, साथ ही होनेवाली धर्महानि रुकती है । केवल ऐसा ही व्यक्ति धर्मरक्षा का कार्य कर सकता है । इससे यह समझ में आता है कि हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का कार्य केवल धर्म का पालन करनेवाले तथा आध्यात्मिक साधना करनेवाले हिन्दू ही कर सकते हैं तथा रामराज्य ला सकते हैं, ऐसा मार्गदर्शन सनातन संस्था के धर्मप्रचारक सद्गुरु नंदकुमार जाधवजी ने किया । वैश्विक हिन्दू राष्ट्र महोत्सव के चौथे दिन (१९.६.२०२३ को) उपस्थित हिन्दुत्वनिष्ठों को संबोधित करते हुए वे ऐसा बोल रहे थे ।
सद्गुरु नंदकुमार जाधवजी ने आगे कहा, ‘‘केवल इतना ही नहीं, अपितु आध्यात्मिक साधना करने से आत्मविश्वास जागृत होता है तथा व्यक्ति तनावमुक्त जीवन जी सकता है । वह साधना कर अपने कृत्य के फल के कार्य की अपेक्षा किए बिना कार्य कर सकता है तथा प्रत्येक कृत्य से आनंद प्राप्त करता है । फल की अपेक्षा रखे बिना काम करने से वह निःस्वार्थ कर्मयोग होता है, जिससे आध्यात्मिक प्रगति भी होती है । केवल ऐसा व्यक्ति ही धर्मरक्षा का कार्य सकता है । इससे यह समझ में आता है कि हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का कार्य केवल धार्मिक तथा साधना करनेवाले हिन्दू ही कर सकते हैं ।’’
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