शिवजीकी उपासना भावपूर्ण एवं शास्त्रोक्त पद्धतिसे सिखानेवाले सनातनके ग्रन्थ !

देवताकी विशेषताएं एवं कार्य पता चलनेपर देवताकी महिमा समझमें आती है । देवताकी उपासनाका शास्त्र समझमें आनेपर देवताकी उपासनासम्बन्धी श्रद्धा बढती है । श्रद्धासे उपासना भावपूर्ण होती है एवं भावपूर्ण उपासना ही अधिक फलदायी होती है । इसके लिए यह ग्रन्थमाला पढें !
भगवान शिवसम्बन्धी अध्यात्मशास्त्रीय विवेचन
- भगवान शिवकी शारीरिक विशेषताएं क्या हैं ?
- भगवान शिवका तीसरा नेत्र किसका प्रतीक है ?
- भगवान शिवके विविध रूप कौनसे हैं ?
- ज्योतिर्लिंगका अर्थ एवं उसकी विशेषताएं क्या हैं ?
भगवान शिव : अध्यात्मशास्त्र (आरती एवं शिवचालीसा सहित)
- नंदीके सींगोंमेंसे शिवपिण्डीके दर्शन कैसे करें ?
- शिवजीको बिल्वपत्र क्यों और कैसे चढाएं ?
- शिवपिण्डीपर जलकी धारा निरन्तर क्यों बहती है ?
- शिवपिण्डीकी अर्धपरिक्रमा ही क्यों करते हैं ?
(शिवसम्बन्धी अध्यात्मशास्त्रीय विवेचन करनेवाला ‘शिव’ लघुग्रन्थ भी उपलब्ध !)
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अध्यात्म और जलवायु परिवर्तन : क्या इनमें कोई संबंध है ?
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !