Singer Sunny Sante Apology : श्री एकविरा देवी के भक्तिगीत का विडंबन करने वाले गायक द्वारा क्षमायाचना !

  • विश्व हिन्दू परिषद तथा बजरंग दल जैसे संगठनों द्वारा विरोध का परिणाम !

  • भक्तिगीत में ‘अल्लाह’ का उल्लेख !

  • विडंबनात्मक (बिगड़े) गीत पर हिन्दुओं का नृत्य !

गायक सनी संते

डोंबिवली (ठाणे) – यहां एक हिन्दू परिवार के हल्दी समारोह में गायक सनी संते ने श्री एकविरा देवी के सुप्रसिद्ध भक्तिगीत का विडंबन किया । देवी के गीत के मूल शब्दों को परिवर्तित कर उसने उसमें ‘अल्लाह मेरा किसे प्रसन्न हुआ ? प्रसन्न हुआ रफीक आ, रफीक आ मंडप में, प्रसन्न हुआ मोहम्मद आ, मोहम्मद आ मंडप में’ जैसे शब्दों का समावेश किया । उसने मध्य-मध्य में अपशब्दों का प्रयोग भी किया । इस गीत पर नृत्य करने वाले भी हिन्दू ही थे; परंतु किसी ने भी इसका प्रतिकार नहीं किया । इस प्रकरण में ‘आगरी-कोली हिन्दुत्वनिष्ठ संगठन’ के आक्रामक होने के पश्चात गायक ने क्षमायाचना करते हुए कहा, ‘‘भविष्य में मुझसे ऐसी त्रुटि नहीं होगी । मैं क्षमा प्रार्थी हूं । यदि कोई ऐसे गीत गाने की मांग भी करेगा, तब भी मैं उसे नहीं गाऊंगा । मेरा ‘ऑर्केस्ट्रा’ बंद हो जाए, तो भी स्वीकार है ।’’

इस विडंबन के विरुद्ध विश्व हिन्दू परिषद के जिला प्रचार प्रसार प्रमुख एवं अंबरनाथ बजरंग दल के सह-संयोजक शुभम सालुंखे ने सामाजिक माध्यमों द्वारा तीव्र आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘यदि यह व्यक्ति मेरे संज्ञान में आया, तो मैं इसका मस्तक फोड दूंगा; तथा यदि वह किसी अन्य के हाथ लगा एवं उन्होंने उसका मस्तक फोडा, तो उनके जमानत का व्यय मैं स्वयं वहन करुंगा ।’’

(और इनकी सुनिए…) ‘यह सब मात्र मनोरंजन हेतु चल रहा है !’ – गायक सनी संते

गीत गाते समय गायक सनी संते सभी से विनती कर रहा था, यह सब मात्र मनोरंजन के लिए चल रहा है । कोई भी इसका चलचित्र (वीडियो) न बनाए । अन्यथा दुर्गति होगी तथा हमारा कार्यक्रम बंद हो जाएगा । (उस समय किसी भी हिन्दू ने विरोध क्यों नहीं किया ? – संपादक)

 

संपादकीय भूमिका

  • मनोरंजन एवं धन के लिए किसी भी स्तर तक गिरना तथा पश्चात क्षमा मांग लेना, इसे हिन्दू अब सहन नहीं करेंगे !
  • वैचारिक धर्मांतरण का शिकार हुए ऐसे हिन्दुद्रोहियों के कार्यक्रमों का हिन्दुओं को पूर्णतः बहिष्कार करना चाहिए !
  • विडंबनात्मक गीतों पर नृत्य करने वाले तथा इस विषय पर मौन रहने वाले हिन्दू ही हिन्दू धर्म के वास्तविक शत्रु हैं !
  • आज एक कार्यक्रम में ऐसा गीत गाया गया है, यदि भविष्य में सर्वत्र ही इस्लाम का गुणगान करने वाले गीत गाए जाने लगें, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए !