
‘हिन्दुओ, आपातकाल निकट आता जा रहा है । इस काल में प्रभु श्रीराम व हनुमानजी के आशीर्वाद से हम पार हो सकते हैं । इस आपातकाल के उपरांत रामराज्य की स्थापना होगी । आपातकाल में स्वयं सहित परिजन, गांव और राष्ट्र की रक्षा हो तथा आगामी रामराज्य के लिए उपयुक्त रामभक्त निर्माण हों, इस व्यापक उद्देश्य से प्रतिदिन एक बार श्रीरामरक्षा और मारुतिस्तोत्र अथवा हनुमान चालीसा का पाठ करें । साथ ही अपनी नियमित साधना भी जारी रखें । किसी प्रदेश में हनुमानजी का अन्य स्तोत्र प्रचलित हो, तो उसका पाठ करें । स्तोत्रपाठ का अधिक प्रभाव होने के लिए स्तोत्र के प्रत्येक शब्द का अर्थ और भावार्थ ध्यान में रखकर वह भावपूर्वक करें । इन दो देवताओं की उपासना करना ही कालानुसार साधना है ।’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले (२३.१.२०२६)
(श्रीरामरक्षा और मारुतिस्तोत्र का अर्थ जानने के लिए सनातन का लघुग्रंथ ‘श्रीरामरक्षास्तोत्र, मारुतिस्तोत्र व हनुमानचालीसा (अर्थ सहित)’ पढें ।)
पूजाघर में श्रीराम के साथ हनुमानजी की भी पूजा करें !
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‘प्रभु श्रीराम एवं हनुमानजी एक ही सिक्के के दो पहलुओं के समान हैं । अत: श्रीराम की उपासना में हनुमानजी का भी स्थान है । रामरक्षा में भी हनुमानजी का उल्लेख है । इसलिए पूजाघर में श्रीराम का चित्र या प्रतिमा हो, तो साथ में हनुमानजी का भी चित्र या प्रतिमा रखकर उनकी भी नित्य पूजा करें ।’
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले (२३.१.२०२६)


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