Bangladeshi Infiltrators : महाराष्ट्र सहित भारत में बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाने के लिए बडे गिरोह के सक्रिय होने की आशंका !

  • २ वर्षों में मुंबई के ८० से अधिक स्थानों पर ८६८, जबकि महाराष्ट्र में कुल १,२३७ बांग्लादेशी घुसपैठिए पकडे गए !

  • घुसपैठियों के पास भारतीय नागरिकता से जुडे कागज पत्र पाए गए !

– श्री प्रीतम नाचणकर, विशेष प्रतिनिधि, दैनिक सनातन प्रभात

पकडे गए बांग्लादेशी घुसपैठिए

मुंबई, २४ जनवरी (वार्ता.) – वर्ष २०२४ एवं २०२५ के समय मुंबई में अलग-अलग ८० से अधिक स्थानों पर ८६८, जबकि नवी मुंबई, ठाणे, मीरा-भाईंदर, पनवेल, नागपुर, नाशिक, पुणे एवं नांदेड में ७२३ बांग्लादेशी घुसपैठिए पकडे गए हैं । इन २ वर्षों में पूरे महाराष्ट्र में कुल १,२३७ बांग्लादेशी घुसपैठिए सामने आए हैं । भले ही पुलिस ने इन सभी घुसपैठियों को बंदी बना लिया हो, परंतु उनके पास बडी संख्या में भारतीय नागरिकता के प्रमाणपत्र मिलना अत्यधिक चिंताजनक है ।

श्री. प्रीतम नाचणकर

इससे यह संकेत मिलता है कि महाराष्ट्र सहित पूरे देश में बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाने के लिए एक बडा गिरोह सक्रिय है तथा प्रशासन के कुछ अधिकारी भी उन्हें सहयोग कर रहे हैं । राज्य के अन्य क्षेत्रों की तुलना में मुंबई के कोने-कोने में पाए गए बांग्लादेशी घुसपैठियों के आंकडे यह दर्शाते हैं कि मुंबई घुसपैठियों की मुख्य पसंद बन चुकी है । जांच एजेंसियों को इस पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच करने की आवश्यकता है ।

पकडे गए सभी बांग्लादेशी घुसपैठियों के प्रकरणों में संबंधित पुलिस थानों में कुल ७२६ अपराध पंजीकृत किए गए हैं । ये घुसपैठिए सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं या नहीं, इसकी जांच के लिए राज्य के आतंकवाद निरोधक दल (ATS) ने स्वास्थ्य विभाग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, आवास विभाग, राजस्व विभाग सहित विभिन्न सरकारी विभागों को घुसपैठियों के नामों की सूची भेजी है । इस संबंध में जांच जारी है ।

मुंबई की गलियों में बांग्लादेशी घुसपैठिए !

नागपाडा, वरळी, कुर्ला, धारावी, नेहरू नगर, मानखुर्द, चुनाभट्टी, घाटकोपर, मुलुंड, विक्रोली, भांडुप, विले पार्ले, वर्सोवा, बांद्रा, जुहू, सांताक्रूज, खार, अंधेरी, साकीनाका, जोगेश्वरी, गोरेगांव, मालवणी, मालाड, बोरीवली, चारकोप, दहिसर, वडाला, माहीम आदि मुंबई के ८० से अधिक क्षेत्रों में बांग्लादेशी घुसपैठिए पाए गए हैं । इस सूची से स्पष्ट होता है कि मुंबई की गलियों तक में घुसपैठिए फैले हुए हैं ।

आतंकवाद निरोधक दल ने जताई चिंता !

हालांकि इन बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड लिया गया है, परंतु उनके द्वारा प्राप्त सभी नकली (फर्जी) कागदपत्र (दस्तावेज) अब तक पुलिस के हाथ नहीं लगे हैं । ATS ने आशंका जताई है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर ये घुसपैठिए विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं । इसी कारण महाराष्ट्र ATS के अपर पुलिस महानिदेशक नवल बजाज के हस्ताक्षर से विभिन्न सरकारी विभागों को घुसपैठियों के नामों की सूची भेजी गई है और इसकी जांच जारी है ।

नागरिकता प्रमाण माने जाने वाले ये दस्तावेज घुसपैठियों के पास पाए गए !

जन्म प्रमाणपत्र, मतदान कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड आदि – भारतीय नागरिकता के प्रमाण माने जाने वाले ये महत्त्वपूर्ण कागजी प्रमाणपत्र बांग्लादेशी घुसपैठियों के पास पाए गए हैं । ये सभी प्रमाणपत्र नकली (फर्जी) प्रमाणों के आधार पर तैयार किए गए हैं ।

प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली !

आतंकवाद निरोधक दल द्वारा मई २०२५ में यह सूची विभिन्न सरकारी विभागों को भेजी गई थी; परंतु संबंधित विभागों की योजनाओं में घुसपैठियों के नाम समाहित हैं या नहीं, इसकी जांच की गति बहुत ही धीमी है । ८ महीने बीत जाने के उपरांत भी कुछ सरकारी विभागों ने गृह विभाग को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है । इसलिए सरकार को इस प्रकरण को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है ।

कुल मिलाकर, पिछले कुछ वर्षों में निरंतर उजागर हो रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या को देखते हुए यह आशंका नकारी नहीं जा सकती कि महाराष्ट्र में इनकी संख्या लाखों में हो सकती है । स्थानीय स्तर पर मिलने वाला सहयोग एवं प्रशासन से प्राप्त नकली प्रमाणपत्र – दोनों ही अत्यंत गंभीर विषय हैं । इसके लिए सरकार, पुलिस, प्रशासन एवं नागरिकों को मिलकर बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान तथा कार्रवाई में योगदान देना आवश्यक है ।

संपादकीय भूमिका 

महाराष्ट्र में इतनी बडी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठियों का मिलना, एक प्रकार से जांच एजेंसियों की विफलता है । साथ ही घुसपैठियों के पास भारतीय नागरिकता के कागज पत्र ( दस्तावेज ) मिलना प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार का संकेत है । देश को खोखला करने वाले ऐसे अधिकारियों पर सरकार को कडी कार्रवाई करनी चाहिए !