
कन्नूर (केरल) – गुरुकुल में वैदिक शिक्षा ग्रहण करनेवाले, कन्नूर निवासी गोविंद कृष्णन एम. शीघ्र ही तिरुवनंतपुरम स्थित थुंबा में ‘इसरो’ के प्रमुख केंद्र ‘विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर’ में वैज्ञानिक के रूप में कार्यभार ग्रहण करनेवाले हैं ।
१. वैदिक अध्ययन में निपुण गोविंद, जहां उनके गुरुकुल के सहपाठी पौरोहित्य की ओर प्रवृत्त हुए, वहीं वे विज्ञान की ओर मुड गए । गोविंद कहते हैं, ‘आध्यात्म एवं विज्ञान एकत्र नहीं आ सकते’, ऐसा कहा जाता है; किंतु यह संभव है, यह मैंने सिद्ध किया है ।
२. वे आगे बोले, “मेरे जीवन के पहले चरण में मैंने वैदिक शिक्षा को अपनी सर्वश्रेष्ठता दी तथा दूसरे चरण में मैंने विज्ञान को अपना सर्वस्व दिया । किंतु मैंने कभी भी एक के लिये दुसरे को अनदेखा नही किया ।”
३. वर्ष २०११ में उन्होंने पय्यान्नूर स्थित केंद्रीय विद्यालय से कक्षा ४ पूर्ण करने के उपरांत नियमित शिक्षा त्याग दी एवं त्रिशूर स्थित ब्रह्मास्वम मठ में ४ वर्ष गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण की ।
४. गोविंद का उपनयन संस्कार तब हुआ था, जब वे चौथी कक्षा में थे एवं उसके तुरंत उपरांत उन्होंने गुरुकुल की यात्रा आरंभ की ।
५. तत्पश्चात गोविंद ने पुनः नियमित विद्यालय जाना आरंभ किया । गुरुकुल में रहते हुए उन्होंने दसवीं तक की शिक्षा पूर्ण की । उसके उपरांत गुरुकुल से बाहर आकर नाटक शिक्षा हेतु मंगलुरु स्थित मूडबिद्री के अल्वाज विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया । तत्पश्चात उन्होंने थिरुवनंतपुरम स्थित वलियामला के ‘इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नॉलॉजी’ से ‘बी.टेक’ पदवी प्राप्त की।
६. गोविंद का चयन ‘इसरो सेंट्रल रिक्रूटमेंट बोर्ड’ प्रक्रिया द्वारा हुआ है एवं जुलाई में वे आधिकारिक रूप से ‘इसरो’ में कार्यभार ग्रहण करनेवाले हैं।
७. अपने व्यावसायिक जीवन में भी दैनिक धार्मिक क्रियाएं जारी रखने की उनकी इच्छा है । वे कहते हैं कि, वैदिक शिक्षा ने उन्हें ध्यान, अनुशासन एवं सामर्थ्य प्रदान किया है।
८. गोविंद के पिता हरेश कुमार भारतीय नौसेना के भूतपूर्व अधिकारी हैं ।
संपादकीय भूमिका
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