फरीदाबाद में सच्चिदानंद परमार्थ ट्रस्ट की ओर से ‘तनाव मुक्त जीवन हेतु अध्यात्म’ विषय पर विशेष प्रवचन !

उपस्थित शिक्षक जिज्ञासा से सुनते हुए

फरीदाबाद (हरियाणा) – यहां के NIT स्थित नेहा पब्लिक स्कूल में सच्चिदानंद परमार्थ ट्रस्ट की ओर से शिक्षकों के लिए ‘तनावमुक्त जीवन हेतु अध्यात्म’ विषय पर एक विशेष एवं प्रेरणादायक प्रवचन आयोजित किया गया । कार्यक्रम में विद्यालय के सभी शिक्षकगणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया ।

प्रवचन का उद्देश्य था, शिक्षकों को वर्तमान समय की भागदौड भरी जीवनशैली, कार्यभार और मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने हेतु अध्यात्म का महत्त्व समझाना । प्रवचन के दौरान सच्चिदानंद परमार्थ ट्रस्ट की श्रीमती वंदना सचदेवा ने बताया कि ‘शिक्षक केवल विद्यार्थियों को शिक्षा देनेवाले नहीं, अपितु समाज के भविष्य का निर्माण करनेवाले सच्चे मार्गदर्शक होते हैं । इसलिए उनका मानसिक रूप से शांत, संतुलित और सकारात्मक रहना अत्यंत आवश्यक है ।’

उन्होंने बताया कि ‘आज के समय में तनाव, चिंता और असंतुलित दिनचर्या के कारण व्यक्ति के स्वास्थ्य एवं कार्यक्षमता पर विपरीत प्रभाव पडता है । यदि प्रतिदिन कुछ समय प्रार्थना, आत्मचिंतन एवं ईश्वर स्मरण के लिए निकाला जाए, तो मन को शांति, आत्मबल और नई ऊर्जा प्राप्त होती है । अध्यात्म व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाता है और कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने की शक्ति देता है ।’

शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ‘जब गुरु स्वयं प्रसन्नचित्त, संयमित व सकारात्मक रहेंगे, तभी वे विद्यार्थियों को भी उत्तम संस्कार, अनुशासन व जीवन के श्रेष्ठ मूल्य प्रदान कर सकेंगे । अध्यात्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, यह जीवन को सही दिशा देनेवाली श्रेष्ठ जीवनशैली है ।’

कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने भी अपने विचार व्यक्त किए और इस प्रकार के आयोजन को समय की आवश्यकता बताया । उन्होंने कहा कि ‘ऐसे प्रेरणादायक प्रवचन मानसिक तनाव को कम करने तथा जीवन में नई ऊर्जा भरने का कार्य करते हैं ।’

विद्यालय प्रबंधन ने सच्चिदानंद परमार्थ ट्रस्ट का आभार व्यक्त करते हुए कहाए ‘ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों के व्यक्तित्व विकास, मानसिक सशक्तिकरण एवं आध्यात्मिक उन्नति में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं । अंत में सभी उपस्थितजनों ने तनावमुक्त, सकारात्मक एवं आध्यात्मिक जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया । इसका लाभ १४ शिक्षकों ने लिया ।

क्षणिका

विद्यालय के शिक्षकों ने प्रति माह ऐसे सत्संग रखने की मांग की और कहा कि छात्रों के लिए भी इस प्रकार के कार्यक्रम उनके विद्यालय में रखें, जिससे छात्रों का भी तनाव कम होकर वे भी सकारात्मक रह पाएं और उनका व्यक्तित्व विकास हो पाए ।