
सातारा, २५ मई (संवाददाता) : सातारा जिले के वाई स्थित कर्मठ सनातनी प्रवृत्तियों ने सातारा के छत्रपति प्रतापसिंह महाराज, नाना जगन्नाथ शंकर शेठ एवं राजर्षि शाहू महाराज का विरोध किया था । राजर्षि शाहू महराज को वेदोक्त का अधिकार नहीं है, ऐसी भूमिका लेनेवाली सनातनी शक्तियों के विरुद्ध स्वामी केवलानंद सरस्वती ने धर्मसुधार की लडाई लडी थी । वर्तमान समय में सनातनी प्रवृत्तियों द्वारा लघु कुंभपर्व के माध्यम से प्रतिगामी विचारों को बल दिया जा रहा है, ऐसा प्रतिपादन अधिवक्ता असीम सरोदे ने किया ।
अधिवक्ता सरोदे ने कहा, ‘‘वाई में होनेवाले लघु कुंभपर्व पर सरकार की ओर से १ करोड ५० लाख रुपए का व्यय किया जा रहा है । इस धनराशि का विनियोग निश्चितरूप से किसके लिए तथा किसलिए किया जा रहा है ?, इसकी पारदर्शी जानकारी जनता के सामने रखी जानी चाहिए । लघु कुंभपर्व के लिए उपस्थित साधु-संत कौन हैं ?, उनकी क्या पृष्ठभूमि है तथा सामाजिक क्षेत्र में उनका क्या योगदान है ?, इसकी कोई भी आधिकारिक जानकारी नागरिकों को नहीं दी गई है । केवल धार्मिकता के नाम पर लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड किया जा रहा है । पूरे देश में अनेक स्थानों पर कुछ तथाकथित बाबाओं पर मादक पदार्थाें का सेवन, धोखाधडी करने तथा अंधविश्वास फैलाने के आरोप लगे हैं; इसलिए इस लघु कुंभपर्व में सहभागी होनेवाले साधुओं की पृष्ठभूमि की पडताल आवश्यक है ।’’
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