जितेंद्र त्यागी की ‘मोहम्मद’ पुस्तक पर प्रतिबंध लगाने की मांग दिल्ली उच्च न्यायालय ने नकार दी !

इस्लाम का त्याग कर हिन्दू धर्म स्वीकारने वाले जितेंद्र त्यागी (पूर्वाश्रम के वसीम रिजवी) द्वारा लिखी ‘मोहम्मद’  पुस्तक पर प्रतिबंध लगाने के लिए प्रविष्ट याचिका दिल्ली उच्च न्यायालय ने नकार दी है ।

‘ओमिक्रॉन’ के बढते प्रभाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव आगे करने पर विचार करना चाहिए !

यदि चुनाव के कारण और रैलियोें के कारण कोरोना के संक्रमण में बढोतरी होती होगी, तो यह चुनाव आगे टालना आवश्यक ही है ! यह क्यों बताना पड रहा है ?

मद्रास उच्च न्यायालय की ऑनलाइन सुनवाई के समय, अधिवक्ता की महिला के साथ अश्लील हरकतें !

जनता को लगता है कि, न्यायालय की इस प्रकार अवमानना करने वाले अधिवक्ताओं को न्यायालय कठोर दंड दें !

टीका प्रमाणपत्र पर प्रधानमंत्री मोदी के छायाचित्र का विरोध करने वाली याचिका केरल उच्च न्यायालय ने निरस्त की 

याचिकाकर्ता पर लगाया गया १ लाख का जुर्माना !

अहिन्दुओं को मंदिर में दुकानों की नीलामी प्रक्रिया में धर्म के आधार पर रोका नहीं जा सकता ! – उच्चतम न्यायालय का निर्णय

१२ ज्योतिर्लिंगों में से एक आंध्रप्रदेश का मल्लिकार्जुन मंदिर का प्रकरण
आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय का आदेश रहित

दिल्ली के दंगोें के पहले भाजपा नेता की ओर से किए गए द्वेषपूर्ण विधानों की जांच करने की मांग पर जल्दी निर्णय लें !

उच्चतम न्यायालय का दिल्ली उच्च न्यायालय को आदेश

रोहिणी न्यायालय बम विस्फोट प्रकरण में, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के वैज्ञानिक को बंदी बनाया गया !

सेना के लिए शस्त्रास्त्रों की निर्मिति करने वाले रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन में कार्यरत एक वैज्ञानिक की यदि ऐसी आपराधिक वृत्ति है, तो यह समाज के लिए घातक है !

देहली में दंगे करवाने का उद्देश्य हिन्दुओं में भय और दहशत पैदा करना था ! – दिल्ली न्यायालय

क्या देहली में सत्तारूढ आम आदमी पार्टी के साथ-साथ अन्य पाखंडी धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दल और संगठन, न्यायालय की इस टिप्पणी पर अपना मुंह खोलेंगे ?

वित्तीय दुर्व्यवहार अधिनियम का प्रयोग लोगों को कारागृह में डालने के शस्त्र के रुप में नहीं कर सकते ! 

उच्चतम न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय को फटकारा !

पहले के सात्त्विक राजा और आज के तामसिक शासनकर्ताओं का स्वयं को हुए दंड के संदर्भ में भिन्न दृष्टिकोण !

पहले के काल में राजा ने कोई भी पाप किया हो और वह किसी ने देखा न हो, तब भी वह राजा अपने राज्य का दायित्व छोडकर प्रायश्चित्त लेने के लिए जंगल में जाते थे; परंतु आज के शासनकर्त्ता स्वयं का अपराध प्रमाण सहित सिद्ध होने पर भी स्वयं का पाप नहीं स्वीकारते ।