अधिवक्ता से वाद-विवाद होने के कारण, उन्हें जान से मारने के लिए रखा था बम !
सेना के लिए शस्त्रास्त्रों की निर्मिति करने वाले रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन में कार्यरत एक वैज्ञानिक की यदि ऐसी आपराधिक वृत्ति है, तो यह समाज के लिए घातक है ! – संपादक

नई देहली : पुलिस ने यहां रोहिणी न्यायालय में ९ दिसंबर को हुए बम विस्फोट के प्रकरण में एक वैज्ञानिक को बंदी बनाया है । उसने ‘न्यायालय क्रमांक १०२’ में बम लगाया था । भारत भूषण कटारिया नाम के इस वैज्ञानिक की आयु ४७ वर्ष है । वह रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डी.आर.डी.ओ.) में वरिष्ठ वैज्ञानिक है । जांच के अनुसार, वैज्ञानिक का एक वकील के साथ वाद-विवाद हो गया था, जो उसके पडोस में रहता था । उसे मारने के लिए ये बम लगाया था । पुलिस को इस वैज्ञानिक के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य प्राप्त होने के उपरांत, उसे बंदी बनाया लिया गया है । यह प्रकाश में आया है, कि वह इस प्रकरण में अकेला भागीदार था ।
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