सर्वाधिक जनसंख्यावाले देश का स्थाई सदस्यों में समावेश न होते हुए भी संयुक्त राष्ट्र विश्व का कैसे प्रतिनिधित्व कर सकते हैं ?
आज के स्थाई सदस्य देश क्या विश्व के वास्तविक प्रतिनिधि हैं ?, यह प्रश्न अब उठ रहा है । जिस उद्देश्य से उन्हें स्थाई स्थायी सदस्यों के रूप में स्थापित किया गया, तो क्या आज वे उसकी आपूर्ति करने में सक्षम हैं ? विशेषकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद इस विसंगति का प्रतीक है ।