रूस-यूक्रेन युद्ध के माध्यम से विश्व असुरक्षित विश्वरचना की ओर अग्रसर !
रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण कर ‘प्रत्यक्ष रूप से युद्ध नहीं होगा’, ऐसे सभी सिद्धांतों को झूठा साबित करना
रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण कर ‘प्रत्यक्ष रूप से युद्ध नहीं होगा’, ऐसे सभी सिद्धांतों को झूठा साबित करना
संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक बार फिर पाकिस्तान की भारत विरोधी कृत्य सामने आई है । संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूक्रेन-रूस युद्ध के मुद्दे पर चर्चा हो रही थी और पाकिस्तान के प्रतिनिधि मुनीर अकरम ने कश्मीर का मुद्दा उठाया और इसकी तुलना रूस-यूक्रेन युद्ध से की ।
यूक्रेन के १० शहरों पर रूस का आक्रमण !
बेलारूस द्वारा रूस को सार्वजनिकरूप से (खुूले आम ) लष्करी सहायता !
रूस के विरुद्ध युद्धसज्ज (युद्ध के लिए तैयार) रहने की ‘नाटो’ की घोषणा !
रूस से भारत के शस्त्र क्रय करने का समर्थन करते हुए भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान को शस्त्र आपूर्ति करने वाले पाश्चिमात्य देशों कडी फटकार लगाई । वे १० अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री विनी वोंग के साथ आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में बोल रहे थे ।
रशिया और उसके अधिकार वाले क्रिमिया के बीच बने कर्च पुल पर हुआ विस्फोट, यह युक्रेन द्वारा किया गया आतंकवादी आक्रमण है, ऐसा आरोप रशिया के राष्ट्रपति पुतिन ने किया । उनके गुप्तचर विभाग ने योजनाबद्ध ढंग से यह आतंकवादी आक्रमण किया ।
पोप फ्रांसिस ने कहा कि यह युद्ध अब गंभीर, विनाशकारी और धोकादायक हो गया है । इसका परिणाम केवल इन देशों पर ही नहीं अपितु संपूर्ण विश्व पर हो रहा है ।
रूस-यूक्रेन युद्ध कूटनीति के आधार पर रोका जाय, ‘इस युद्ध में भारत किसके पक्ष में है ?’ हमें नित्य ऐसा पूछा जाता है । इस पर हमारा एक ही सीधा एवं प्रामाणिक उत्तर है, ‘भारत शांति के पक्ष में है और इस पर सदैव अडिग रहेगा’, ऐसा भारत के विदेशमंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र की महासभा में प्रतिपादन किया ।
मेक्सिको ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर स्थायी समाधान निकालने हेतु संयुक्त राष्ट्र समिति स्थापित कर उसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पोप फ्रान्सिस एवं संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटेनियो गुटेरेस को समाहित करने का प्रस्ताव दिया है ।
रूस एवं युक्रेन में युद्ध आरंभ हुए ७ माह हो गए, तब भी अमेरिका सहित पश्चिमी देश रूस की आक्रमकता पर लगाम कसने में असफल रहे हैं ।
यह बदला लेने की अथवा ‘पश्चिम के विरोध में एशियाई देश’ ऐसा विरोध करने का समय नहीं । हमारे सामने आए आवाहनों को एकत्रित रुप से सामना करने का यही समय है, ऐसा फ्रांस के राष्ट्रपति इमेन्युएल मेक्रॉन ने कहा है ।