३ शंकराचार्यों द्वारा श्री रामलला की प्राणप्रतिष्ठा कार्यक्रम का समर्थन !
३ शंकराचार्यों ने इस कार्यक्रम का समर्थन किया है, केवल ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य ने इसका धर्मशास्त्र के आधार पर विरोध किया है ।
३ शंकराचार्यों ने इस कार्यक्रम का समर्थन किया है, केवल ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य ने इसका धर्मशास्त्र के आधार पर विरोध किया है ।
इस वीडियो से हम जानेंगे, कोलकाता के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन पदाधिकारी एवं ‘भारतीय साधक समाज’ संगठन के संस्थापक अध्यक्ष श्री. अनिर्बान नियोगी को हुए कारसेवा के अभूतपूर्व अनुभव ।
स्मरण रखें, समाजवादी पक्ष के नेता मुलायम सिंह यादव का हिन्दू द्वेश ! हिन्दू बहुल भारत में ऐसी स्थिति का होना हिंन्दुओं के लिए अत्यंत लज्जास्पद है ! यदि आप की अपेक्षा है कि कोई हिंन्दुओं की ओर वक्र दृष्टि से देखने का साहस न करे, तो हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करें!
श्रीराममंदिर के लिए पिछले ३१ वर्षों से झारखंड के धनबाद की ८५ वर्षीय श्रीमती सरस्वती देवी मौन व्रत का पालन कर रही हैं । श्रीराममंदिर के उद्घाटन के लिए वे अयोध्या पहुंच गई हैं ।
श्रीराममंदिर में कुल ४६ द्वार स्थापित किए जाएंगे । उनमें से ४२ द्वारों को १०० किलो सोने का लेप किया जाएगा ।
उन दिनों में श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन प्रतिदिन तीव्र बनता जा रहा था तथा उसका नेतृत्व विश्व हिन्दू परिषद ने (विहिप ने) किया था । रा.स्व. संघ इस आंदोलन का समर्थन करे, यह विहिप की अपेक्षा थी तथा संघ ने वैसा किया भी । जिस परिसर में विहिप का कार्य अल्प था अथवा नहीं था, वहां संघ ने दायित्व लिया ।
सब जानते हैं कि अब तक श्री राम को काल्पनिक बताने वाली कांग्रेस की यह सद़्बुद्धि नहीं है, लेकिन राजनीतिक हानि से बचने के लिए यह निर्णय लिया गया है !
इतिहास का इससे अधिक अपमान और क्या हो सकता है ? वास्तव में अब हिन्दुओं को ही इस प्रकार के अनुचित प्रचार के विरुद्ध विश्व को सच्चा इतिहास बताना चाहिए एवं ‘निर्द्वंद हिन्दू बनने के लिए’ (अनअपोलोजेटिक हिन्दू) राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेडना चाहिए !
इन मूर्तियों की विशेषता यह है कि ये सभी मूर्तियां मंदिर की सीढ़ियों के पास विराजमान की गई हैं । ये कलाकृतियां बिहार, उत्तर प्रदेश तथा गुजरात के कारीगरों द्वारा बनाई गई हैं ।
पता चला है कि भारतीय किसान मंच और भारतीय गौ सेवा परिषद के अध्यक्ष देवेंद्र तिवारी ने यह षड्यंत्र रचा था ।