१९७१ के युद्ध में, पाक सेना ने मंदिर गिरा कर २५० से अधिक हिन्दुओं की हत्या की थीं !
ध्यान दें, कि पाक सेना के इस हिन्दू-द्वेषी कृत्य के संबंध में भारत का एक भी भारतीय आधुनिकतावादी एवं धर्मनिरपेक्षतावादी कभी भी बात नहीं करता है !
ध्यान दें, कि पाक सेना के इस हिन्दू-द्वेषी कृत्य के संबंध में भारत का एक भी भारतीय आधुनिकतावादी एवं धर्मनिरपेक्षतावादी कभी भी बात नहीं करता है !
पाकिस्तान में कानून एवं व्यवस्था का अस्तित्व ही नहीं है, यही यह घटना स्पष्ट करती है ! क्या भारत में तथाकथित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रतावाले, श्रीलंकाई नागरिक के पक्ष में खडे होंगे ? क्या वे न्यूनतम धर्मांधों के इस कृत्य का विरोध करेंगे ?
शत्रुराष्ट्र का गुणगान करने वालों को ‘देशद्रोही’ घोषित कर सरकार को उन्हें आजीवन कारावास में डालना चाहिए !
पाकिस्तान के एक राजनीतिक दल, ‘मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट’ (एम.क्यू.एम.) के अध्यक्ष अल्ताफ हुसैन ने संयुक्त राष्ट्र, भारत और ब्रिटेन से मांग की है !
यह चूक अब भारत को संशोधित करनी चाहिए, ऐसा ही राष्ट्रप्रेमियों को लगता है !
क्या भारत के अधोगामी एव पुरोगामी इस विषय में बात करेंगे ? अथवा वो समझते हैं, कि यह सब कट्टरपंथियों के लिए क्षम्य है ?
पाकिस्तान ने उनके देश में अल्पसंख्यकों का विशेषत: हिन्दुओं का नरसंहार जो ७४ वर्षोंसे हो रहा हैं, उनकी रक्षा करने पर ध्यान देना चाहिए ! जिहादी आतंकवादी, जिहादी विचारधारा और प्रत्यक्ष कृति, यह वहां के अल्पसंख्यकों की जान ले रही है, इस संदर्भ में इमरान खान क्यों नहीं बोलते ?
‘भारत में, पाकिस्तान के समान, अन्य देशों के लोगों की ईशनिंदा के नाम पर अमानवीय हत्या नहीं होती !’, यह फवाद चौधरी क्यों नहीं बताते ?
ऐसे शासकोंवाले देश में निर्दोषों की हत्या नहीं होगी, तो क्या होगा ? इसे ध्यान में रखते हुए, विश्व समुदाय पाकिस्तान का बहिष्कार करे ; यही एकमात्र उपाय है ! कम से कम श्रीलंका और भारत को तो यह निर्णय लेना ही चाहिए !
यद्यपि यह एक विश्वविद्यालय है, किन्तु मंदिर की वार्षिक तीर्थयात्रा महाराजा प्रताप सिंह और रणबीर सिंह के शासनकाल के समय प्रसिद्ध हुई थी। १९४७ में विभाजन के उपरांत, तीर्थयात्रा बाधित हुई और मंदिर की उपेक्षा की गई।