विश्वयुद्ध, भूकंप आदि आपदाओं का प्रत्यक्ष सामना कैसे करें ?
दो सुनामी लहरों में बहुधा कुछ मिनटों अथवा घंटों का अंतर हो सकता है । इसलिए पहली सुनामी की लहर आने के पश्चात भी आगे आनेवाली संभावित बडी लहरों का सामना करने की तैयारी रखें ।
दो सुनामी लहरों में बहुधा कुछ मिनटों अथवा घंटों का अंतर हो सकता है । इसलिए पहली सुनामी की लहर आने के पश्चात भी आगे आनेवाली संभावित बडी लहरों का सामना करने की तैयारी रखें ।
‘सनातन प्रभात’ नियतकालिकों के जालस्थल (वेबसाइट) पर नियतकालिकों में प्रकाशित किए जानेवाले लेख जालस्थल की विविध ‘कैटेगरीज’ में विभाजित किए गए हैं । इनमें अंतरराष्ट्रीय / राष्ट्रीय / राज्यस्तरीय / स्थानीय समाचार, राष्ट्र-धर्म लेख, साधना, अनुभूति इत्यादि विविध ‘कैटेगरीज’ का समावेश है ।
‘२.११.२०२१ को ‘धनतेरस’ है । ‘धन’ अर्थात शुद्ध लक्ष्मी ! इस दिन मनुष्य के पोषण हेतु सहायता करनेवाले धन (संपत्ति) की पूजा की जाती है । सत्कार्य हेतु धन अर्पण करना, यही श्री लक्ष्मी की खरी पूजा है ।’
वर्तमान में आश्रम के रोगी-साधकों को ‘सोनोग्राफी’ जांच हेतु ४ कि.मी. अंतर पर स्थित फोंडा शहर अथवा २० कि.मी. अंतर पर स्थित मडगांव शहर में निजी स्थानों पर भेजना पडता है । इसलिए अब रामनाथी आश्रम में ‘सोनोग्राफी जांच यंत्र’ उपलब्ध होना अति आवश्यक है ।
स्वयं ग्रंथ खरीदने के साथ ही मित्र-परिवार और अन्य परिचितों को भी ग्रंथ खरीदने के साथ ही उसका प्रचार करने के लिए प्रेरित करें !
एक ही समय में १० अथवा उससे अधिक ग्रंथ खरीदनेवाले ऐसे जिज्ञासुओं की अलग सूची जिले में बनाएं । साथ ही जब सनातन का कोई नूतन ग्रंथ प्रकाशित हो, तब उन्हें संपर्क कर वह नूतन ग्रंथ दिखाने की व्यवस्था करें ।
‘वेद, उपनिषद, पुराण आदि धर्मग्रंथ गत सहस्रों वर्षाें से मार्गदर्शन कर रहे हैं, इसके साथ ही सनातन के ग्रंथ आगे सहस्रों वर्ष मानवजाति का मार्गदर्शन करेंगे’, ऐसा आशीर्वाद एक संत ने दिया है ।
वर्तमान में नवरात्रोत्सव के काल में (नित्य ही) हाथ में ‘सैनिटाइजर’ लगाकर नीरांजन पर हाथ घुमाकर आरती ग्रहण न करें । उदबत्ती (अगरबत्ती), दीपस्तंभ अथवा रसोईघर का चूल्हा इत्यादि प्रज्वलित करने के पहले हाथ धोने हों, तो साबुन से ही हाथ धोएं ।
गंभीर स्थिति के रुग्ण को चिकित्सालय में ले जाना अथवा अधिक कुशलता के चिकित्सकीय उपचार हेतु अन्यत्र स्थलांरित करना, इन कार्याें के लिए रुग्णवाहिका तत्काल और सहज उपलब्ध होना अनिवार्य है ।
आजकल अनेक साधकों को अनिष्ट शक्तियों के कष्ट हो रहे हैं । पितृपक्ष के काल में (२१ सितंबर से ६ अक्टूबर २०२० की अवधि में) इन कष्टों में वृद्धि होने से इस कालावधि में प्रतिदिन न्यूनतम १ घंटा ‘ॐ ॐ श्री गुरुदेव दत्त ॐ ॐ’ नामजप करें ।