सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार

साम्यवाद का स्वीकार करने के कारण बंगाल एवं केरल के हिन्दुओं की स्थिति दयनीय !

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी

‘बंगाल एवं केरल के हिन्दुओं ने ३० वर्ष से भी अधिक समय से साम्यवाद का स्वीकार किया है; इसलिए वे हिन्दुत्व से दूर हो गए । अत: उनमें धर्माभिमान नहीं बचा । इसलिए आज की स्थिति में वे मुसलमानों तथा ईसाइयों के आक्रमणों का सामना नहीं कर पा रहे हैं ।’


वैज्ञानिकों के शोध कार्य तथा ऋषि-मुनियों के ज्ञान में अंतर !

‘किसी एक सतही भौतिक खोज के लिए वैज्ञानिकों को वर्षों तक शोध कार्य करना पडता है । उसमें आगे चलकर अन्य वैज्ञानिक परिवर्तन भी करते हैं । इसके विपरीत, ऋषि-मुनियों को सूक्ष्म से मिलनेवाले ज्ञान के कारण शोध कार्य नहीं करना पडता, अपितु क्षणभर में ही सूक्ष्म से भी सूक्ष्म सभी प्रश्नों के उत्तर मिल जाते हैं; और वह अंतिम सत्य होने के कारण कोई उसमें परिवर्तन नहीं कर सकता ।’


पश्चिमी तथा हिन्दू संस्कृति में भेद !

‘पश्चिमी संस्कृति स्वेच्छा को बढावा देनेवाली व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रोत्साहित करती है और दु:ख को निमंत्रित करती है; जबकि हिन्दू संस्कृति यह सिखाती है कि ‘स्वेच्छा नष्ट कर सत्-चित्-आनंदावस्था कैसे प्राप्त कर सकते हैं ।’

– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत बाळाजी आठवले