आइए भारत में पुनः एक बार ‘रामराज्य’ की ध्वजा स्थापित करने हेतु प्रतिबद्ध हो जाएं !

नव संवत्सर के निमित्त सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी का संदेश

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी

 ‘हिन्दू संस्कृति में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा केवल नववर्ष का आरंभ नहीं है, अपितु अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक अत्यंत शुभ दिवस है । प्रभु श्रीराम जब १४ वर्ष का वनवास समाप्त कर तथा आसुरी शक्तियों का विनाश कर अयोध्या लौटे, तब अयोध्या के भक्त नागरिकों ने आनंद एवं विजय के प्रतीक के रूप में घर-घर ब्रह्मध्वजा स्थापित की । वही विजय उत्सव और वही आदर्श की ध्वजा आज भी हमें वास्तव में ‘रामराज्य’ स्थापित करने की प्रेरणा देती है । रामराज्य में ही सच्चा सुख और आनंद अनुभव किया जा सकता है ।

रामराज्य अर्थात ऐसा राज्य, जहां आध्यात्मिक श्रद्धा सुशासन में परिवर्तित होती है । आज के समय में भी भारत में आदर्श राजा, सात्त्विक प्रजा, सुशासन एवं सुरक्षा से युक्त रामराज्य स्थापित करना ही कालानुसार सच्ची धर्मस्थापना है । रामराज्य के लिए नागरिकों की पात्रता अर्थात उनका ‘साधक’ (नित्य साधना करनेवाला या भगवद्भक्त) होना आवश्यक है । जब समाज के व्यक्ति आध्यात्मिक दृष्टि से उन्नत एवं धर्मसंस्कारों से युक्त होते हैं, तभी वास्तव में आदर्श राष्ट्ररचना साकार होती है ।

नववर्ष के शुभ मुहूर्त पर आइए, घर के बाहर ब्रह्मध्वज स्थापित करने के साथ-साथ रामराज्य के सिद्धांतों पर आधारित राष्ट्ररचना के लिए योगदान देने और साधना करने का संकल्प लें । आइए भारत में पुनः एक बार ‘रामराज्य’ की ध्वजा स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हो जाएं !’

– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले