परतंत्रता का लज्जाजनक इतिहास मिटाएं !

‘हिन्दुओ, गत ९०० वर्षों की परतंत्रता का लज्जाजनक इतिहास मिटाने के लिए अब जागृत हो जाओ !’
अध्यात्म विहीन विज्ञान का मूल्य शून्य है !
‘मानव को साधना एवं अध्यात्म सिखाए बिना वह ‘सुखी जीवन जी सके’, इसके लिए विविध उपकरण देनेवाले विज्ञान का मूल्य शून्य है ।’
केवल इन्हीं लोगों को चुनाव में मत देने का अधिकार हो !
‘जिनके मन में राष्ट्र एवं धर्म के प्रति प्रेम है और वे उसके लिए कुछ करते हैं, उन्हीं को चुनाव में मत देने का अधिकार हो । केवल इसी से राष्ट्र की सर्वांगीण प्रगति होगी ।’
हास्यास्पद साम्यवाद !
‘अध्यात्म के ‘प्रारब्ध’ शब्द की तथा ईश्वर की पूर्ण अनदेखी करने के कारण साम्यवाद १०० वर्ष में ही समाप्त होने की कगार पर है !’
चुनाव में खडे होनेवाले प्रत्याशियो, यह ध्यान में रखो !
‘राष्ट्रप्रेम एवं धर्मप्रेम न रखनेवाले एवं चुनाव में खडे प्रत्याशी से पैसे लेकर उसे मत देनेवाली जनता के प्रतिनिधि के रूप में चुने जाने की तुलना में, ईश्वर द्वारा भक्त के रूप में चुना जाना अनंत गुना महत्त्वपूर्ण है, यह ध्यान में रखो !’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत बाळाजी आठवले
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !
इरोड (तमिलनाडु) में ‘महासुदर्शन याग’ एवं ‘आयुष्य होम’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न !