वर्तमान शिक्षाप्रणाली में विद्यमान अभाव की भरपाई करनेवाला सनातन का बालसंस्कारवर्ग !

‘वर्तमान विद्यालयीन शिक्षा में स्वभावदोषों एवं दुर्गुणों पर कैसे विजय प्राप्त करनी चाहिए, इस विषय में कभी भी सिखाया नहीं जाता । यह वर्तमान शिक्षाप्रणाली का प्रमुख दोष है । अभिभावको, सनातन संस्था अपने बालसंस्कारवर्गाें के माध्यम से यह सिखा रही है ।’
सनातन के साधकों की आध्यात्मिक उन्नति तीव्र गति से होने का एक कारण !
‘सनातन द्वारा बताई गुरुकृपायोग अनुसार साधना के अंतर्गत साधक, अपने स्वभावदोष एवं अहं निर्मूलन के लिए प्रयास करते समय, सदैव अंतर्मुख रहते हैं । जिस कारण उन्हें साधना के लिए अंतर्मन से सहायता मिलती है । फलस्वरूप उनकी आध्यात्मिक उन्नति भी तीव्र गति से हो रही है ।’
अन्य संप्रदाय एवं सनातन संस्था
‘किसी भी संप्रदाय में केवल उस संप्रदाय के संबंध में अथवा उस संप्रदाय के संतों के विषय में लेखन होता है; परंतु सनातन संस्था में संतों के साथ साधकों का भी लेखन होता है ।’
अध्यात्म का प्रसार करते समय यह स्मरण रखें !
‘ईश्वर का अस्तित्व न माननेवाले क्या कभी ईश्वरप्राप्ति के लिए साधना करने का विचार कर सकते हैं ? साधक अध्यात्मप्रसार करते समय ऐसे लोगों से बात करने में समय व्यर्थ न करें !’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत बाळाजी आठवले
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
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