पालघर की अराजकता !
महाराष्ट्र को संतों की महान परंपरा प्राप्त है । संतों ने साधना कर अपना तथा समाज का उद्धार करने की शिक्षा दी है । इसलिए यहां आज भी संतों का मान-सम्मान किया जाता है; परंतु महाराष्ट्र की इस परंपरा पर १६ अप्रैल को निर्मम प्रहार हुआ ।
महाराष्ट्र को संतों की महान परंपरा प्राप्त है । संतों ने साधना कर अपना तथा समाज का उद्धार करने की शिक्षा दी है । इसलिए यहां आज भी संतों का मान-सम्मान किया जाता है; परंतु महाराष्ट्र की इस परंपरा पर १६ अप्रैल को निर्मम प्रहार हुआ ।
कुछ वर्ष पूर्व एक युवक आतंकी संगठन इसिस में भर्ती होने हेतु इराक जाने के मार्ग में था । भारतीय गुप्तचर संस्थाओं ने उसे भाग्यनगर (हैदराबाद) हवाई अड्डे पर रोका । कल्याण से ४ युवक इसिस में जाने हेतु भागे थे ।
आज के बच्चे कल के आदर्श भारत के शिल्पकार हैं ! पश्चिम के अंधानुकरण एवं ‘टीवी’ के अतिरेक से भटक रही आज की पीढी को सुसंस्कारी एवं आदर्श बनाने का मार्ग है, ‘बालसंस्कार’ ग्रंथमाला !
कोरोना के प्रकोप होने की स्थिति में चिंता होना, भय प्रतीत होकर अस्वस्थ लगना आदि स्वभावदोषों का प्रकटीकरण होने की संभावना रहती है । अतः उचित स्वसूचनाएं देने से प्राप्त स्थिति से बाहर निकलने में सहायता मिलती है ।
आजकल कोविड-१९ की चिकित्सा करने हेतु पूरे विश्व में चर्चा में रहे क्लोरोक्वीन औषधि के जनक महान वैज्ञानिक आचार्य प्रफुल्लचंद्र रे के संदर्भ में जानकारी लेना महत्त्वपूर्ण होगा ।
तापमान एवं कोरोना विषाणु के विषय में विविध देशों के शास्त्रज्ञों द्वारा किया हुआ व्यापक अध्ययन !
यह लेख कोई चिकित्सकीय सलाह नहीं है । यह लेख इन दिनों में प्रकाशित अनेक ब्यौरे और अध्ययन पर आधारित है ।
स्वाईन फ्लू रोग कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, उसे जानबूझकर बनाया गया है । इस महामारी के लिए स्विट्जरलैंड प्रतिष्ठान नोवार्टीस व फोर्ट डोट्रिक नामक अमेरिकन सेना की बायोलॉजिकल प्रयोगशाला अपराधी है ।
सुपरमैन जैसे काल्पनिक पात्र नहीं; अपितु श्री हनुमान जैसे देवता ही संकटकाल में हमारी रक्षा हेतु दौडकर आ जाते हैं । अतः उनकी भक्ति करें !
सेल्फी के कारण किशोरावस्था के बालक तथा बालिकाओं में ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर नामक रोग बढ रहा है । हाल ही में एम्स चिकित्सालय में इस बीमारी से ग्रस्त तीन लडकियों के उपचार किए गए हैं ।
बालक सुसंस्कारी बनें तथा वे शिक्षा प्राप्त कर देश के आदर्श नागरिक बनें, इसलिए हम अपने बालकों को विद्यालय भेजते हैं; परंतु वर्तमान धर्मनिरपेक्ष शिक्षा व्यवस्था के वातावरण में बालकों में शीघ्रता से बढनेवाली कुप्रवृत्तियां धर्मनिरपेक्ष शिक्षा व्यवस्था की असफलता को दर्शाती हैं ।