भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा १२ अरब डॉलर्स का स्वर्ण बेचने का किया गया था तथ्यहीन दावा !

न्यूयॉर्क (अमरीका) – अमरीकन समाचार संस्था ‘ब्लूमबर्ग’ ने २ जून को प्रकाशित हुआ भारत के विरोध का लेख वापस ले लिया । इस लेख में ईरान के संघर्ष की पृष्ठभूमि पर भारत का विदेशी मुद्रा भण्डार सुधारने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने (‘आर.बी.आई.’ ने) अनुमानतः १२ अरब डॉलर्स का स्वर्ण बेचने का दावा किया गया था । इस लेख में अमरीका-ईरान तनाव, ब्रेन्ट क्रूड तेल के मूल्य प्रति बैरल १०० डॉलर्स के ऊपर जाना, रुपये का डॉलर के बदले ९७ तक अवमूल्यन एवं पूंजी बाहर जाना इनका उल्लेख करके सोना बिक्री का तर्क रखा गया था ।
स्वर्ण के भण्डार में न्यूनता (कमी) नहीं ! – भारत
तथापि आर.बी.आई. ने स्पष्ट किया कि, बाजार मूल्य के उतार-चढाव के कारण मूल्यांकन में आंशिक परिवर्तन दिखाई दिए होने पर भी, भौतिक स्वर्ण के भण्डार में कोई भी कमी नहीं हुई है । ‘आर.बी.आई.’ ने इन समाचारों का दृढता से खण्डन करते हुए वर्तमान का भौतिक स्वर्ण का भण्डार ८८०.५२ मेट्रिक टन इतना ही बने रहने की बात स्पष्ट की । ‘स्वर्ण की बिक्री के विषय में प्रसारमाध्यमों में आए समाचार अचूक नहीं हैं’, ऐसा बताते हुए नागरिकों से अधिकृत समाचारों की जानकारी पर ही विश्वास रखने का आवाहन भी भारत ने किया ।
दावा त्रुटिपूर्ण विश्लेषण पर आधारित होने की ‘ब्लूमबर्ग’ द्वारा स्वीकृति !
‘ब्लूमबर्ग’ की दक्षिण एशिया कार्यकारी सम्पादक जेनेट रॉड्रीग्ज ने स्पष्ट किया कि, आर.बी.आई. के स्वर्ण के भण्डार का मूल्य मापते समय उसी दिन के देश के स्वर्ण के मूल्यों का त्रुटिपूर्ण पद्धति से उपयोग किया गया । वास्तव में ‘लन्दन बुलियन मार्केट एसोसिएशन’ के पूर्व दिन के मूल्यों के अनुसार गणना करने पर मई मास में स्वर्ण का भण्डार अपरिवर्तित रहने की बात दिखाई देती है । इसलिए ‘ब्लूमबर्ग’ ने लेख वापस ले लिया ।
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