१ उचित विचार मन को ५ बार बताएं । यह कृति दिनभर में ५ बार करें ।
कोरोना के प्रकोप होने की स्थिति में चिंता होना, भय प्रतीत होकर अस्वस्थ लगना आदि स्वभावदोषों का प्रकटीकरण होने की संभावना रहती है । अतः उचित स्वसूचनाएं देने से प्राप्त स्थिति से बाहर निकलने में सहायता मिलती है । मनोबल बढकर स्थिर रहना संभव होने हेतु अंतर्मन को कौनसी स्वसूचनाएं दी जा सकती हैं, इसका विवरण आगे दिया गया है ।


(मन की समस्याओं को दूर करने हेतु उसे उचित स्वसूचनाएं देना स्वभावदोष-निर्मूलन प्रक्रिया का भाग है । स्वभावदोष-निर्मूलन प्रक्रिया को समझने हेतु पढें – सनातन की ग्रंथमाला स्वभावदोष एवं अहं निर्मूलन (५ खंड))
अधिक जानकारी हेतु देखें : bit.ly/33XU8y1
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?
सनातन आश्रम, रामनाथी के भावपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ ‘आयुष्य होम’ !
साधकों को स्वभावदोष एवं अहं के निर्मूलन की प्रक्रिया सिखाकर स्वसूचनाओं के द्वारा स्वभावदोषों पर विजय प्राप्त करने का मार्गदर्शन करनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी !