
रामनाथ देवस्थान – भारत में जब गुरु-शिष्य परंपरा थी, तब भारत विश्वगुरु था । उस काल में असंख्य ग्रंथ लिखे गए । विदेश से विद्यार्थी यहां सीखने आते थे और अब उसका उलटा हो रहा है । भारत के ८ लाख ८० सहस्र विद्यार्थी विदेश में पढ रहे हैं और कालांतर में वे वहीं पर स्थायिक होनेवाले हैं । इसलिए भारत को यहां की शिक्षाव्यवस्था के स्तर को उठाने का प्रयत्न करना आवश्यक है, ऐसे उद्गार ‘इंडियन नैशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज’के संयोजक श्री. अनिल धीर ने ‘वैश्विक हिन्दू राष्ट्र महोत्सव’के ५ वे दिन (२०.६.२०२३) किए ।

वे आगे बोले, ‘‘ओडिशा में ६२ जनजातियां हैं । हमने वनवासियों से ३० सहस्र पोथियां एकत्र कीं और उन सभी को ओडिशा राज्य के संग्रहालय में भिजवा दिया । इन पोथियों में श्लोक इत्यादि नहीं थे, अपितु विमानों की निर्मिति कैसे करें ?, मंदिरों के निर्माण कार्य कैसे करें ? आदि प्रत्येक विषय पर विवरण दिया गया था । इससे ध्यान में आता है कि सहस्रों वर्षों पूर्व उन्होंने कितने उच्च स्तर का लेखन किया था । ऐसे आदिवासियों के पास काेई लिपी नहीं थी । उनका यह ज्ञान पिता से पुत्र का हस्तांतरित होता गया । इन आदिवासी बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले, तो भारत अधिक अच्छी प्रगति करेगा । इसलिए सरकार को उनके लिए विशेष विद्यायल शुरू करने की आवश्यकता है।’’
| जगन्नाथपुरी में २० जून को विश्वप्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा होते हुए भी इस दिन ओडिशा के हिन्दू धर्माभिमानी श्री. अनिल धीर ‘वैश्विक हिन्दू राष्ट्र महोत्सव’में उपस्थित थे । |
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