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देहरादून (उत्तराखंड) – सामने आया है कि राज्य में १०० से अधिक अवैध मस्जिदें निर्माण की गई हैं । यहां के सहसपुर क्षेत्र में स्थित मदरसा अवैध होने का समाचार हाल ही में स्थानीय प्रसारमाध्यमों द्वारा प्रसिद्ध होने के उपरांत अब एक के बाद एक इस प्रकार १०० से अधिक अवैध मस्जिदें निर्माण किए जाने के समाचार ‘पांचजन्य’ नामक नियतकालिक द्वारा प्रकाशित किए गए हैं । खास बात यह है कि २० सितंबर २००९ को सर्वाेच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि ‘किसी भी धार्मिक स्थल का निर्माणकार्य अथवा उसकी दुरुस्ती करने से पूर्व स्थानीय प्रशासन की अनुमति लेना अनिवार्य है ।’ तथापि देखा गया है कि इस आदेश का उल्लंघन किया गया है ।
सहसपुर में मदरसे के अवैध निर्माण का मामला सुर्खियों में आया है।
इसी तरह पछुवा देहरादून में एक दो नहीं बल्कि कई मदरसे आलीशान इमारतों में तब्दील हो रहे हैं।
खास बात यह है कि इन इमारतों में मस्जिदें भी बनाई जा रही हैं।https://t.co/bx1Y2261xs
— Panchjanya (@epanchjanya) April 28, 2023
१. उत्तराखंड राज्य के पछुवा क्षेत्र में अनेक मदरसों का रूपांतरण बडे भवनों में किया गया है, साथ ही उनके परिसर में मस्जिदों का निर्माणकार्य हो रहा है । इसके लिए सरकार द्वारा आवश्यक मानचित्र सम्मत कर नहीं लिए गए ।
२. देहरादून के निकट ‘शिमला बायपास रोड’ पर १०० से अधिक मस्जिदें सरकार की अनुमति बिना ही निर्माण की गई हैं । इसके लिए सरकार की भूमि हडप ली गई है ।
उत्तराखंड मजार जिहाद।
देहरादून निगम क्षेत्र में 53 मजारें!
क्या इतने सूफी-फकीर थे जो सड़क किनारे और बगीचों में दफन हुए?
https://t.co/nvRZJKuDqd— Panchjanya (@epanchjanya) April 27, 2023
३. एक मस्जिद नदीपात्र के निकट निर्माण की गई है । यह भूमि वन विभाग के नदी क्षेत्र की है ।
४. राजधानी देहरादून से पोंटासहिब जाते समय मुख्य रास्ते पर सेलाकोई क्षेत्र में करोडों रुपए खर्च कर एक बडे मदरसे का निर्माण बिना अनुमति किया जा रहा है । इस मदरसे के परिसर में मस्जिद का निर्माणकार्य हो रहा है ।
५. इसी तरह राज्य के सेलाकोई क्षेत्र के जमनपुर में किसी प्रकार की अनुमति बिना एक मदरसा एवं मस्जिद का निर्माणकार्य हुआ है ।
६. इतने ऊंचे भवनों का निर्माण होते हुए भी स्थानीय प्रशासन एवं ‘मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण’ इसकी ओर अनदेखी क्यों कर रहा है ?, ऐसा प्रश्न उठ रहा है । स्थानीय नागरिक पूछ रहे हैं, क्या इसके पीछे राजनीतिक दबाव है ?
७. अन्यथा कहा जाता है कि सामान्य नागरिकों के घर के बाहर एक ईंट का निर्माणकार्य करने के लिए भी अनुमति की आवश्यकता रहती है । तो फिर इतने बडे मदरसे, मस्जिदें एवं मजारें शांति से क्यों निर्मित की जा रही हैं ?, ऐसा प्रश्न नागरिकों द्वारा उपस्थित किया जा रहा है । (३०.४.२०२३)
सभी मदरसों एवं मस्जिदों को नोटिस भेजी गई है ! – विकास प्राधिकरण
‘मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण’ के प्रमुख बंशीधर तिवारी को जब इस संदर्भ में पूछा गया, तब उन्होंने कहा कि ये प्रकरण हमारे विभाग में आए हैं एवं सभी को नोटिस भेजी गई है । इन प्रकरणों की अनदेखी करनेवाले संबंधित अधिकारियों से इसका उत्तर देने के भी आदेश दिए गए हैं । |
संपादकीय भूमिका
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