नाशिक में रिक्शा चालकों ने अपनी रिक्शाओं से नींबू-मिर्च एवं काली गुडिया हटाई !

  • अंधश्रद्धा निर्मूलन के नाम पर ‘अंनिस’ द्वारा हिन्दू प्रथाओं पर आघात।

  • अंनिस की ‘बुवाबाजी विरोधी’ परिषद के उपरांत हुई घटना !

नाशिक – चांडक सर्कल के समीप रिक्शा चालकों ने अपने वाहनों से नींबू-मिर्च एवं काली गुडिया हटा दी है । नगर के सिटू भवन में हाल ही में महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (अंनिस) द्वारा आयोजित ‘बुवाबाजी विरोधी’ परिषद में ‘नींबू-मिर्च तोडो, विवेक से जुडो’ जैसे नारे लगाए गए थे । इसी पृष्ठभूमि में इस घटना के होने की संभावना है ।

रिक्शा चालकों का कहना था कि “नींबू-मिर्च केवल भोज्य वस्तुएं हैं, उनका शुभ-अशुभ से कोई संबंध नहीं है ।” इस आंदोलन में रिक्शा चालक शरद भामरे, दिलीप देवरे, गणपत सोनवणे के साथ अंनिस के कार्यकर्ता भी उपस्थित थे । (आज रिक्शा से नींबू-मिर्च हटाई गई, कल यही लोग घरों से देवी-देवताओं की मूर्तियां व चित्र हटाने के लिए कहेंगे या कुलधर्म-कुलाचार को भी ‘अंधविश्वास’ बताकर त्यागने को कहेंगे । रिक्शा चालकों की यह कार्रवाई हिन्दू धर्म पर एक प्रकार का सांस्कृतिक आक्रमण ही है ! – संपादक)

संपादकीय भूमिका

  • नींबू एवं मिर्च में नकारात्मक शक्तियों को खींच लेने की क्षमता होती है । इसलिए इन्हें वाहनों या घर के मुख्य द्वार पर बांधा जाता है । जब तक हिन्दू अपने धर्म की क्रियाओं के पीछे का ‘विज्ञान’ एवं ‘शास्त्र’ नहीं समझेंगे, तब तक वे अंनिस जैसे लोगों के प्रभाव में आकर वैचारिक रूप से धर्मांतरण का शिकार होते रहेंगे !
  • ‘विवेक से जुडो’ कहने वाली अंनिस ने कभी अन्य धर्मों की अविवेकपूर्ण प्रथाओं के विरुद्ध सम्मेलन आयोजित किए हों, ऐसा सुनने में नहीं आया ! केवल सरल स्वभाव के हिन्दुओं को लक्ष्य बनाकर उनके मन से आस्था को समाप्त करना ही अंनिस का छद्म लक्ष्य है । कुंभनगरी नाशिक में रिक्शा चालकों का नास्तिक विचारधारा के प्रभाव में आना दुर्भाग्यपूर्ण है !