US Iran War : अमेरिका ने ईरान के चाबहार बंदर पर किया आक्रमण

ईरान के ९० सैन्य एवं नौसैनिक ठिकानों को बनाया लक्ष्य

तेहरान (ईरान) – अमेरिका तथा ईरान के बीच हुआ ‘शांति समझौता’ टूट गया है तथा खाडी क्षेत्र में एक बार फिर युद्ध भडक उठा है । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम समाप्त होने की घोषणा के पश्चात ९ जुलाई की प्रातः अमेरिका ने ईरान के दक्षिण-पूर्व स्थित रणनीतिक महत्त्ववाले चाबहार बंदर पर मिसाइलों से भीषण आक्रमण किया । दोनों देशों द्वारा लगातार दूसरे दिन भी एक-दूसरे पर आक्रमण किए जा रहे हैं, जिससे खाडी क्षेत्र में पुनः व्यापक युद्ध छिडने के संकेत मिल रहे हैं ।

ईरानी मीडिया के अनुसार, ९ जुलाई को चाबहार शहर में एक के बाद एक कई भीषण विस्फोट हुए । इन आक्रमणों के उपरांत शहर की बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है । आक्रमण के तुरंत पश्चात स्थानीय आपातकालीन सेवाएं और एम्बुलेंस घटनास्थल पर पहुंचीं ।

ईरान की सैन्य क्षमता को समाप्त करने के लिए किया गया आक्रमण ! – अमेरिका

अमेरिकी सेना के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के ९० सैन्य एवं नौसैनिक ठिकानों को सटीक लक्ष्य बनाया है । अमेरिका का कहना है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही में बाधा डालने की ईरान की क्षमता को समाप्त करने के उद्देश्य से यह सैन्य कार्रवाई की गई । अमेरिका ने यह भी आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से जानेवाले व्यापारिक जहाजों एवं निर्दोष कर्मचारियों पर हुए आक्रमणों के लिए ईरान ही उत्तरदायी है ।

विवाद का आरंभ कैसे हुआ ?

७ जुलाई को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जा रहे तीन व्यापारिक जहाजों पर अज्ञात आक्रमणकरियों ने आक्रमण किया था । अमेरिका ने इन आक्रमणों के पीछे सीधे ईरान का हाथ होने का आरोप लगाया था । इसी के प्रतिशोध में अमेरिका ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की । इससे अप्रसन्न ईरान ने कुवैत, बहरीन आदि देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर आक्रमण किए । इसके उपरांत राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी कि “ईरान के एक आक्रमण का प्रत्युत्तर २० आक्रमणों से दिया जाएगा ।”

भारत को लग सकता है बड़ा झटका !

रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह के विकास एवं संचालन के लिए भारत ने ईरान के साथ १० वर्ष का समझौता किया है । यह लगभग ४,२०० करोड रुपये की परियोजना है । यदि चाबहार बंदरगाह को भारी क्षति होती है, तो इसका बडा आर्थिक एवं सामरिक प्रभाव भारत पर भी पड सकता है ।