Maharashtra Madarsa Grant : महाराष्ट्र सरकार द्वारा ३०८ मदरसों को ५० लाख रुपयों का अनुदान स्वीकृत !

  • छत्रपति संभाजीनगर में सर्वाधिक १०३ मदरसों को लाभ

  • नागपुर एवं ठाणे जनपद भी सम्मिलित

नागपुर – महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के ३०८ मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए ५० लाख रुपयों का अनुदान स्वीकृत किया है । ‘डॉ. जाकिर हुसैन मदरसा आधुनिकीकरण योजना’ के अंतर्गत २१ जिलों के इन मदरसों पर यह धनदान किया जाएगा एवं इस संदर्भ में शासन का निर्णय (अध्यादेश) घोषित किया गया है । अल्पसंख्यकों के सर्वांगीण विकास का नाम देकर यह निधि वितरित की जा रही है; परंतु इस प्रकरण में हिन्दू समाज क्षुब्ध है ।

छत्रपति संभाजीनगर में सर्वाधिक मदरसों का ‘आधुनिकीकरण’ !

सरकार द्वारा घोषित आंकड़ों के अनुसार छत्रपति संभाजीनगर जिले में सर्वाधिक १०३ मदरसों को १६ लाख ७२ सहस्र रुपयों का अनुदान प्राप्त होगा । उसके पश्चात नागपुर के ५७ मदरसों को ९ लाख २५ सहस्र रुपये, तो ठाणे जनपद के ३८ मदरसों को ६ लाख १६ सहस्र रुपये दिए जाएंगे । इसके साथ ही मुंबई नगर के १२, मुंबई उपनगर के १२, जलगांव के ३, कोल्हापुर के ३, सोलापुर के ४, सतारा के ५, लातूर के ६, बीड के २०, जालना के १३, यवतमाल के ११, गढचिरौली के ७ जैसे २१ जिलों के मदरसे लाभार्थी सूची में सम्मिलित हैं ।

धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक विषयों के नाम पर निधि !

इस योजना द्वारा मदरसों में केवल धार्मिक शिक्षा न देकर विज्ञान, गणित, समाजशास्त्र, हिंदी, मराठी एवं अंग्रेजी विषय पढाए जाएंगे, साथ ही उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति भी दी जाएगी । जिससे मदरसों के विद्यार्थियों की गुणवत्ता बढकर रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे, ऐसा सरकार का तर्क है । यह संपूर्ण निधि संबंधित जिलाधिकारियों के माध्यम से मदरसों को वितरित की जाएगी ।

संपादकीय भूमिका 

  • भारत में अनेक स्थानों पर मदरसों में धर्मांधता की शिक्षा दी जाती है एवं वहां आतंकवादी गतिविधियों को प्रोत्साहन दिए जाने के अनेक उदाहरण सामने आए हैं । ऐसा होते हुए भी मदरसों की जांच करने के स्थान पर उन पर धन की वर्षा करना जनता को कैसे अच्छा लगेगा ?
  • धर्मनिरपेक्ष देश में सभी धर्मावलंबियों के धार्मिक स्थलों के लिए नहीं, अपितु केवल मदरसों को दिया जाने वाला यह अनुदान तुष्टीकरण ही है ! इसके लिए हिन्दुओं का कर के रूप में दिया गया धन उपयोग किया जाता है, यह अलग से बताने की आवश्यकता नहीं है !
  • जिन राज्यों में संस्कृत पाठशालाओं एवं हिन्दू धर्म के संवर्धन के लिए कार्य करने वाली संस्थाओं को निधि देते समय संकोच किया जाता है , वहां मदरसों पर धन लुटाना कितना उचित है ?