जेन-जी (Gen-Z) को यदि कोई लोग ईमानदार लगते हैं, तो वे तुरंत उनसे प्रभावित हो जाते हैं !

प.पू. सरसंघचालक मोहनजी भागवत का बयान

प.पू. सरसंघचालक मोहनजी भागवत

(जेन-जी यानी वर्ष १९९७ से २०११ की अवधि में जन्मी पीढी । वर्तमान में इस पीढी की आयु १५ से २९ वर्ष है ।)

भाग्यनगर (तेलंगाना) – “जेन-जी अच्छे होते हैं । वे अनुकरणप्रिय होते हैं, भावुक होते हैं । वे शांत दिमाग से विचार नहीं करते । उनके सामने रहे लोग यदि उन्हें ईमानदार लगते हैं, तो वे तुरंत प्रभावित हो जाते हैं,” ऐसा वक्तव्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प.पू. सरसंघचालक मोहनजी भागवत ने यहां आयोजित एक कार्यक्रम में दिया ।

‘LGBTQ’ समुदाय के प्रति सहानुभूति रखें ! – प.पू. सरसंघचालक

इस दौरान परम पूज्य सरसंघचालक ने ‘LGBTQ’ समुदाय (समलैंगिक, उभयलिंगी और लिंग-परिवर्तन करानेवाले लोगों) के बारे में भी बात की । उन्होंने कहा कि ‘LGBTQ’ के विषय में कोई कुछ नहीं कर सकता, वे स्वयं भी इसमें कुछ नहीं कर सकते । वे वैसे ही जन्मे हैं । कुछ लोग अपनी मानसिकता के कारण पश्चात वैसे बने, तो कुछ शारीरिक आकर्षण के कारण । वे भी मनुष्य हैं, उन्हें भी जीने का अधिकार है । समाज में उनके लिए भी एक व्यवस्था है, उन्हें हीन भावना से न देखें । शिखंडी एक राजा था, जो सभी वीरों के साथ युद्ध भूमि में लडने गया था । इसलिए हमारे यहां इसकी एक व्यवस्था थी । ऐसी बातों पर बिना कारण हंगामा किए शांति से उनकी एक व्यवस्था बननी चाहिए, ताकि उनके प्रति समाज की सहानुभूति बनी रहे ।

संपादकीय भूमिका

इसीलिए जेन-जी पीढी के सामने सही आदर्श स्थापित होने चाहिए । उनके द्वारा किए गए आंदोलनों के समय कई युवक-युवतियों की मानसिकता कितनी विचित्र एवं निम्न स्तर तक चली गई है, यह कई वीडियो के माध्यम से सामने आया है । इस कारण से उन्हें सही दिशा देना समय की आवश्यकता है, यह ध्यान में रखा जाना चाहिए !