शांतिपूर्ण पद्धतिसे आंदोलन करना नागरिकों का संवैधानिक मौलिक अधिकार है ! – Supreme Court

जंतर-मंतर पर हुए हिंसक आंदोलन के उपरांत पुलिस के लाठीमार प्रकरण पर सर्वोच्च न्यायालय का निरीक्षण

नई दिल्ली – शांतिपूर्ण पद्धतिसे प्रदर्शन करना नागरिकों का संविधान द्वारा दिया गया मौलिक अधिकार है । केवल इस आधार पर कि कोई आंदोलन या प्रदर्शन चल रहा है, पुलिस के लाठीमार का समर्थन नहीं किया जा सकता । यदि प्रदर्शन या आंदोलन में कुछ अति-प्रसंग या अत्याचार हुए हैं, तो उनकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए । यह समस्या केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, अपितु पूरे देश से संबंधित है, ऐसा सर्वोच्च न्यायालय ने जंतर-मंतर पर हुए हिंसक आंदोलन के उपरांत किए गए लाठीमार पर कहा । न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि देशभर में आंदोलनों से निपटने के लिए एक समान राष्ट्रीय नियमावली होना अत्यंत आवश्यक है । इस प्रकरण की सुनवाई कल होगी ।

१. एक ओर जहां न्यायालय ने पुलिस के लाठियां चलाने पर प्रश्न उठाए, वहीं उसने आंदोलनों में पुलिस पर हो रहे आक्रमणों पर भी गहरी चिंता व्यक्त की । इस समय एक अधिवक्ता ने उग्र भीड द्वारा पुलिस पर किए गए आक्रमणों एवं उनके परिवारों को मिली धमकियों का उल्लेख किया ।

२. इस पर न्यायालय ने कहा कि पुलिस कर्मियों को लगने वाली चोटें एवं उन पर होने वाले आक्रमण भी उतने ही चिंताजनक हैं । ऐसे समय में प्रशासन द्वारा पुलिस को पर्याप्त सुरक्षा क्यों नहीं दी गई, इस पर हम सरकार से उत्तर मांग सकते हैं । पुलिस हो या सामान्य नागरिक, प्रत्येक जीवन समान रूप से महत्वपूर्ण है । आंदोलनों का प्रबंधन करते समय पुलिस एवं प्रशासन के मध्य समन्वय एवं अनुशासन होना अत्यंत आवश्यक है । लोकतांत्रिक प्रक्रिया में आत्म-अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण है ।

३. न्यायालय ने आगे कहा कि यदि कोई शांतिपूर्ण पद्धति से प्रदर्शन करना चाहता है, तो उसके लिए उपयुक्त स्थान एवं स्पष्ट नियम निर्धारित किए जाने चाहिए । शांतिपूर्ण प्रदर्शन में व्यवधान डालने वाले या हिंसा को बढावा देने वाले असामाजिक तत्वों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए । पूरे देश में आंदोलनों से निपटने के लिए एक समान नियमावली होनी चाहिए, जिससे किसी भी राज्य में अधिकारों का दुरुपयोग न हो सके ।

संपादकीय भूमिका

यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक हो जाता है, तो उसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीमार करने के लिए बाध्य होना पडता है - ऐसा प्राय: देखा जाता है !