
१. स्वामी प्रदीप्तानंद महाराजजी (कार्तिक महाराज) का परिचय
भारत सेवाश्रम संघ के स्वामी प्रदीप्तानंद महाराजजी उपाख्य कार्तिक महाराजजी किशोरावस्था में भारत सेवाश्रम संघ की ओर आकर्षित हुए । औरंगाबाद (जिला, मुर्शिदाबाद, बंगाल) में स्वामी प्रज्ञानंद महाराजजी से दीक्षा लेकर वे ब्रह्मचारी बन गए । वे स्वामी हिरण्मयानंद महाराजजी के सान्निध्य में पले-बढे । आयु के २०वें वर्ष में उन्हें मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में नियुक्त कर, उन पर आश्रम बनाने का दायित्व सौंपा गया ।
विशेष सदर

छत्रपति शिवाजी महाराज के हिन्दवी मावले और सैनिकाें का त्याग सर्वोच्च है, ठीक वैसे ही आज भी अनेक हिन्दुत्वनिष्ठ तथा राष्ट्रप्रेमी नागरिक धर्म-राष्ट्र की रक्षा के लिए ‘सैनिक’ के रूप मे कार्य कर रहे हैं । उनकी तथा उनके हिन्दू धर्म-रक्षण के संघर्ष की जानकारी देने वाले ‘हिन्दुत्व के वीर योद्धा’ इस लेखमाला के द्वारा दूसरों को भी प्रेरणा मिलेगी । इन उदाहरणों से अपने मन की चिंता दूर हो कर उत्साह उत्पन्न होगा ! – संपादक
२. स्वामी प्रदीप्तानंद महाराजजी का कार्य
भारत सेवाश्रम संघ के एक कार्यकर्ता द्वारा दी जानकारी के अनुसार, ‘जब स्वामीजी भारत सेवाश्रम में आए, तब बेलडांगा भारत सेवाश्रम संघ के पास कुछ भी नहीं था । धीरे-धीरे उन्होंने एक आश्रम और १२ विद्यालय बनाए । उनमें ३ सहस्र से भी अधिक विद्यार्थी शिक्षा ले रहे हैं । स्वामीजी ने मुर्शिदाबाद में लडकियों की शिक्षा के लिए प्रशंसनीय कार्य किया है । उन्होंने मुर्शिदाबाद जिले में अस्पताल बनवाए । इसके साथ ही उन्होंने बालविवाह विरुद्ध अभियान चलाया । बांग्लादेश के हिन्दुओं पर किए गए अत्याचारों के विरोध में स्वामी प्रदीप्तानंद महाराजजी ने आवाज उठाई । उनकी अध्यक्षता में कोलकाता में भारत का प्रथम ‘लक्ष कंठ गीतापाठ’ का आयोजन किया गया । इसके लिए १ लाख से भी अधिक लोगों ने नाम दिए थे । इसी प्रकार का आयोजन उन्होंने बांग्लादेश एवं उत्तर बंगाल में भी किया । स्वामीजी ने नादिया जिले में २ कुंभमेले आयोजित किए हैं । तृणमूल कांग्रेस के नेता महुआ मोईत्रा ने हिन्दू देवताओं का अनादर किया था । इसके साथ ही दुर्गादेवी की मूर्ति के हाथ में तृणमूल का झंडा दिखाया था । उसके विरोध में भी स्वामीजी ने निदर्शन किए ।
स्वामीजी के प्रवचन से बंगाल में नई क्रांति आई । हिन्दू जागृति के लिए सतत प्रयत्नशील स्वामीजी ‘सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे संतु निरामया:’ की सनातन परंपरा के मार्ग पर निरंतर अग्रसर हैं । वे बंगाल में आक्रामक हिन्दुत्व के ध्वजवाहक हैं । वे वर्ष २०१४ में गोवा में हुए अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन में सम्मिलित हुए थे । उनका शैक्षिक एवं वैद्यकीय कार्य देखकर हाल ही में केंद्र सरकार ने ‘पद्मश्री’ पुरस्कार प्रदान कर उनका सम्मान किया है ।
‘पद्मश्री’ पुरस्कार २०२५

३. स्वामी विवेकानंद सेवा सम्मान
कोलकाता के सुप्रसिद्ध श्री बडा बाजार कुमारसभा पुस्तकालय की ओर से २ मार्च २०२५ को प्रदीप्तानंद महाराजजी को ‘३९वां स्वामी विवेकानंद सेवा सम्मान’ पुरस्कार दिया गया ।
‘भारत सेवाश्रम संघ’ का कार्य

आचार्य प्रणवानंद महाराजजी का सामाजिक कार्य करने और हिन्दू धर्म का प्रसार करने के लिए वर्ष १९१७ में भारत सेवाश्रम संघ की स्थापना की गई । यह संगठन गत १०७ वर्षाें से लोकसेवा में कार्यरत है । आचार्य प्रणवानंद महाराजजी स्वतंत्रता आंदोलन में भी सक्रिय थे । ‘भारत सेवाश्रम संघ’ का मुख्यालय कोलकाता में है और पूरे विश्व में उनके ४६ केंद्र हैं । उन्होंने संपूर्ण भारत के हिन्दू तीर्थयात्रियों के लिए, विशेष रूप से केदारनाथ, बद्रीनाथ, हरिद्वार और गया जैसे स्थानों पर अतिथिगृहों का निर्माण किया है । भारत सेवाश्रम संघ की ओर से अस्पताल और विद्यालय चलाए जाते हैं । सुशिक्षित हिन्दुओं में स्वरक्षा की भावना निर्माण करने के लिए भारत सेवाश्रम संघ हिन्दू मिलन मंदिरों के साथ हिन्दू रक्षा दलों का आयोजन करते हैं । बाढ, चक्रवात (cyclone) और महामारी जैसी विपदाओं में भी उनकी सहायता और पुनर्वसन के कार्य में विशेष सहभाग होता है ।
४. ‘पश्चिम बंगाल परिषद’ में सहभाग
अगस्त २०१२ में हावडा जिले के आर्य समाज मंदिर में ‘पश्चिम बंगाल परिषद’ का आयोजन हुआ था । उसमें हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु चारुदत्त पिंगळेजी एवं आर्य समाज के स्वामी महेश योगीजी के साथ स्वामी प्रदीप्तानंदजी सम्मिलित हुए थे ।
स्वामी प्रदीप्तानंद महाराजजी के ज्वलंत विचार

१. मोहनदास गांधी को राष्ट्रपिता कहना, भारत का दुर्भाग्य है ।
२. लीला करनेवाले श्रीकृष्ण के स्थान पर अब हिन्दुओं को योद्धारूप में श्रीकृष्ण की पूजा प्रारंभ करनी चाहिए ।
३. यदि कोई अपने धर्म का अपमान करे, तो हमें भी उस व्यक्ति को सबक सिखाना चाहिए, यही धर्म की पुकार है ।
४. हिन्दुओं को उन पर हो रहे आक्रमणों का प्रतिकार करने के लिए और प्रतिशोध लेने के लिए तैयार रहना होगा । हिन्दुओं के सभी देवताओं के हाथों में शस्त्र हैं । असुरों से शस्त्रों से लडना होगा । इसलिए प्रत्येक हिन्दू के घर में शस्त्रपूजन करना आवश्यक है ।
५. तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी सरकार का ‘भारत सेवाश्रम संघ’ को विरोध
गत वर्ष स्वामी प्रदीप्तानंद महाराजजी ने चिंता व्यक्त की थी कि बंगाल सरकार ‘भारत सेवाश्रम संघ’ का आश्रम गिरा देगी । इसलिए उन्होंने उच्च न्यायालय में आश्रम को संरक्षण देने की मांग की थी ।
मृतक के नाम पर अभियोग चलाकर मंदिर प्रशासन के विरुद्ध अचलपुर के तहसीलदार के द्वारा दिया गया आदेश न्यायालय ने किया निरस्त ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !