साधकों के लिए सूचना तथा पाठकों से निवेदन !
१५.२.२०२६ को महाशिवरात्रि है । इस उपलक्ष्य में हमें सनातन के ग्रंथ, लघुग्रंथ एवं सात्त्विक उत्पादों को अधिक से अधिक जिज्ञासुओं तक पहुंचाने का स्वर्णिम अवसर प्राप्त हुआ है । इस अवसर का लाभ उठाकर साधक निम्नांकित ग्रंथ एवं प्रसारसामग्री के अधिकाधिक वितरण हेतु प्रयास करें ।

१. सनातन के ग्रंथ
१ अ. भगवान शिव संबंधी अध्यात्मशास्त्रीय विवेचन : इस ग्रंथ में शिवजी के विषय में सामान्यतः अन्य कहीं भी न उपलब्ध अध्यात्मशास्त्रीय विवेचन करने पर बल दिया गया है । शिवजी के कुछ नाम एवं गंगाजी, तीसरा नेत्र, नाग, भस्म, रुद्राक्ष इत्यादि शिवजी की विशेषताओं का आध्यात्मिक अर्थ; ‘महातपस्वी, भूतों के स्वामी, विश्व की उत्पत्ति करनेवाले’ जैसी आध्यात्मिक विशेषताएं एवं कार्य; रुद्र, कालभैरव, नटराज इत्यादि रूप, साथ ही ज्योतिर्लिंग इत्यादि के विषय में सैद्धांतिक विवेचन के साथ ‘भस्म लगाना, नंदीजी के सींगों से शिवलिंग के दर्शन करना, शिवजी को बेल एवं अक्षत समर्पित करना; परंतु हल्दी-कुमकुम न चढाना’ आदि उपासना संबंधी प्रायोगिक विवेचन भी शास्त्र सहित दिया गया है । ‘शृंगदर्शन, शिवजी को बिल्वपत्र समर्पित करना, अभिषेक करना’ इत्यादि के समय सूक्ष्म स्तर पर निश्चित रूप से क्या प्रक्रिया होती है’, यह सर्वसामान्य व्यक्ति नहीं जान पाता । जो साधक यह जानने की क्षमता रखते हैं, उन साधकों द्वारा किए गए ‘सूक्ष्म परीक्षण’ तथा बनाए गए ‘सूक्ष्म चित्र’, इन ग्रंथों की अनोखी विशेषता है । शिवजी के विषय में यह अध्यात्मशास्त्रीय विवेचन शिवभक्तों के लिए तथा शिवजी की सांप्रदायिक साधना करनेवालों के लिए निश्चित ही उपयुक्त सिद्ध होगा ।
१ आ. भगवान शिव की उपासना का अध्यात्मशास्त्र : इस ग्रंथ में ‘शिवपूजा से पूर्व पूजक स्वयं को भस्म कैसे लगाए ? शिवजी के सामने कौन-सी रंगोली बनाए ? शिवजी को कितनी संख्या में कौन-से फूल चढाएं ? उन्हें कौन-सी उदबत्ती (अगरबत्ती)
दिखाएं ? शिवजी को किस गंध का इत्र अर्पण करें ?’ आदि का विवेचन किया गया है । शिवजी की नित्य उपासना करनेवालों के साथ ‘सोलह सोमवार, श्रावणी सोमवार, शिवामूठ, हरितालिका, महाशिवरात्रि’ जैसे व्रत एवं उत्सव मनानेवाले शिवभक्तों के लिए भी, इनके संबंध में किया गया विवेचन उपयुक्त सिद्ध होगा ।
१ इ. लघुग्रंथ ‘शिव’
१ ई. ‘देवता, अध्यात्मशास्त्र, साधना, धार्मिक कृति, आचारधर्म’ इत्यादि के बहुमूल्य ज्ञान से युक्त ग्रंथ
२. देवताओं की नामजप-पट्टियां
विभिन्न देवताओं की नामजप-पट्टियां, साथ ही वास्तुशुद्धि हेतु उपयुक्त नामजप-पट्टियों की वास्तुछत !
३. देवताओं के सात्त्विक चित्र एवं पदक
भगवान शिव, दत्तात्रेय देवता, श्री गणपति, श्रीराम, श्रीकृष्ण, श्री हनुमान, श्री दुर्गादेवी, श्री लक्ष्मी एवं अष्टदेवता के छोटे, मध्यम एवं बडे आकार के चित्र (फ्रेमसहित), साथ ही शिवजी-दुर्गादेवी, दत्तात्रेय देवता-श्री गणपति, श्रीकृष्ण-श्री लक्ष्मी एवं श्रीराम-श्री हनुमान के चित्रों से युक्त पदक (लॉकेट्स) धागे सहित ।

ग्रंथ एवं उत्पाद इत्यादि की प्रदर्शनी आयोजित कर प्रदर्शनी स्थल पर ग्रंथों की जानकारी देनेवाले फ्लेक्स लगा सकते हैं । साधक एवं पाठक स्थानीय वितरकों से उक्त प्रसारसामग्री लें । पाठक, हितचिंतक एवं धर्मप्रेमी उक्त उल्लेखित ग्रंथों एवं अन्य प्रसारसामग्री की मांग स्थानीय वितरकों से करें अथवा 9322315317 इस क्रमांक पर संपर्क करें अथवा sanatanshop.com जालस्थल देखें ।
(१३.१.२०२६)
सनातन का ग्रंथसागर जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करें !
अखिल विश्व में धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र की नींव रखने तथा जिज्ञासुओं को धर्माचरणी बनाने में सनातन द्वारा प्रकाशित ग्रंथों का बहुमूल्य योगदान है ।
महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में ग्रंथ-प्रदर्शनी लगाकर अधिकाधिक लोगों तक ग्रंथ पहुंचाएं । प्रयास करें कि ‘प्रदर्शनी स्थल पर अधिक से अधिक ग्रंथ प्रदर्शित (डिस्प्ले) किए जाएं ।’ स्थान के अभाववश कुछ ग्रंथ प्रदर्शित करना संभव न हो, तो प्रदर्शनी में ग्रंथों की जानकारी देनेवाली ग्रंथसूची रखें । यदि संभव हो, तो नए प्रकाशित ग्रंथों की अलग से रचना कर सकते हैं ।
(१३.१.२०२६)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
मुंबापुरी में सहस्रों के समष्टि संकल्प से राष्ट्ररक्षा हेतु प्राप्त हुआ आध्यात्मिक बल !
Bangladesh Hindus : पिछले ४ महीनों में १०० हत्याएं, २८ बलात्कार एवं ९५ मंदिरों में तोडफोड
संपादकीय : राष्ट्र के लिए त्याग करें !
मथुरा (उत्तर प्रदेश) में रामराज्य की स्थापना हेतु की गई सामूहिक प्रार्थना !
नोएडा (उत्तर प्रदेश) के विद्यालय में ‘लव जिहाद’ विषय पर व्याख्यान