
मुंबई, ८ अगस्त (संवाददाता) : कांग्रेस की भांति भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी संस्कृत भाषा की अवहेलना जारी है । संस्कृत भाषा के संवर्धन हेतु वर्ष २०१२ से महाराष्ट्र में ‘कवि कालिदास संस्कृत साधना’ पुरस्कार आरंभ किया गया है; परंतु यह पुरस्कार संस्कृत दिवस के दिन प्रदान करने का सरकार का निर्णय कागद पर ही रह गया है । जब से यह पुरस्कार आरंभ किया गया, तब से कभी भी संस्कृत दिवस के दिन यह पुरस्कार प्रदान नहीं किया गया । वर्तमान समय में वर्ष २०२१ से लेकर अब तक ‘कवि कालिदास संस्कृत साधना पुरस्कार’ लंबित हैं ।
१. नागपुर के ‘कवि कुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय’की ओर से ये पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं । इसके लिए महाराष्ट्र सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से अनुदान दिया जाता है तथा शिक्षा निदेशालय से इस पुरस्कार प्रक्रिया का नियमन किया जाता है; परंतु इन सभी स्तरों पर यह पुरस्कार प्रदान करने के विषय में उदासीनता दिखाई दे रही है ।
२. संस्कृतदिवस के दिन तो क्या; परंतु विगत अनेक वर्षाें से ये पुरस्कार दिए ही नहीं गए हैं । वर्ष २०१५ से २०२० तक के ६ वर्षाें के पुरस्कार वर्ष २०२१ में दिए गए । उससे पूर्व के २-३ वर्षाें के पुरस्कार भी एकत्रित दिए गए हैं । इन पुरस्कारों के लिए लगी १८ लाख १७ सहस्र ९५७ रुपए की धनराशि सरकार की ओर से विश्वविद्यालय को पिछले अनेक वर्षाें से नहीं दी गई है ।
३. कुछ ही दिन पूर्व अनुदान की यह धनराशि उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय को दी गई ।
इसप्रकार महाराष्ट्र में ‘कवि कालिदास संस्कृत साधना पुरस्कार’की औपचारिकता चल रही है ।
संपादकीय भूमिकामराठी भाषा को राजभाषा की श्रेणी प्राप्त होने के उपरांत अब संस्कृत के संवर्धन के लिए भी प्रयास होने चाहिए ! राज्य सरकार को संबंधित वर्ष में उचित व्यक्तियों को लंबित ‘संस्कृत साधना’ पुरस्कार प्रदान कर इस पुरस्कार की हो रही अवहेलना रोकनी चाहिए ! |
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