नवी मुंबई महानगरपालिका चिकित्सालय में छोटे बच्चों को गोमांस देने का परामर्श का प्रकरण
हिन्दू जनजागृति समिति की नवी मुंबई पुलिस आयुक्त तथा नवी मुंबई महानगरपालिका आयुक्त से मांग
नवी मुंबई – नवी मुंबई महानगरपालिका के वाशी स्थित सार्वजनिक चिकित्सालय में गोमांस सेवन का प्रचार करनेवाली संस्था तथा इसके लिए उत्तरदायी व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, ऐसी मांग हिन्दू जनजागृति समिति ने ज्ञापन के माध्यम से नवी मुंबई पुलिस आयुक्त तथा नवी मुंबई महानगरपालिका आयुक्त से की । इस अवसर पर समिति के डॉ. उदय धुरी, रवींद्र नलावडे, अशोक सावंत और गोविंद दुबे उपस्थित थे । प्रकरण की जानकारी लेकर उचित कार्रवाई करने के निर्देश सह पुलिस आयुक्त दीपक साकोरे ने दिए ।

१. ‘भारतीय बालरोग अकादमी’ विभाग की ओर से “९ से ११ माह आयु के बच्चों के लिए पूरक आहार मार्गदर्शिका” नामक एक आधिकारिक रंगीन सूचना-पत्र महानगरपालिका चिकित्सालय में लगाया गया था । इस पत्रक में शिशुओं के आहार में ‘गोमांस’ सम्मिलित करने की स्पष्ट अनुशंसा की गई थी । इस संदर्भ में हम कुछ महत्त्वपूर्ण बिंदु आपके संज्ञान में लाना चाहते हैं ।
२. महाराष्ट्र में ‘महाराष्ट्र पशु संरक्षण (संशोधित) अधिनियम, १९९५’ के अंतर्गत गौवंश (गाय, बैल, सांड) की हत्या, उनका परिवहन, बिक्री एवं गोमांस रखने पर प्रतिबंध है । ऐसी स्थिति में किसी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में नागरिकों को इस प्रकार के कार्य के लिए सार्वजनिक रूप से प्रेरित करना कानून का प्रत्यक्ष उल्लंघन और प्रशासनिक व्यवस्था को खुली चुनौती है ।
३. महाराष्ट्र सरकार ने गाय को आधिकारिक रूप से ‘राज्यमाता’ का स्थान दिया है । ऐसे राज्य में, जहां गाय को सर्वोच्च सांस्कृतिक एवं कानूनी संरक्षण प्राप्त है, महानगरपालिका के स्वास्थ्य केंद्र में उसके मांसाहार का सार्वजनिक प्रचार राज्य की नीतियों, कानूनों और शासन व्यवस्था का अपमान है ।
४. यह आपत्तिजनक पत्रक केवल कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन नहीं करता, अपितु करोडों लोगों की धार्मिक और भावनात्मक आस्थाओं को भी ठेस पहुंचाता है । हिन्दू धर्म में गाय को अत्यंत पवित्र माना जाता है एवं गोहत्या को महापाप कहा गया है । गाय से प्राप्त विभिन्न वस्तुएं धार्मिक अनुष्ठानों में पवित्र मानी जाती हैं । वर्ष १८५७ का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम भी कारतूसों में गोमांस और धार्मिक भावनाओं के आहत होने के कारण भडका था ।
५. जिन बच्चों को दुर्भाग्यवश मां का दूध नहीं मिल पाता, उनके लिए गाय को दूसरी माता माना जाता है । ऐसे में सरकारी परिसर में “एक मां दूसरी मां का मांस खाए” या बच्चों को ऐसा करने के लिए प्रेरित करने जैसी अवधारणाओं का प्रचार सामाजिक और धार्मिक तनाव उत्पन्न कर सकता है ।
६. गौसंरक्षण केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, अपितु भारतीय कृषि व्यवस्था एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार भी है । भगवान श्रीराम के पूर्वज राजा दिलीप द्वारा गौरक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने की तत्परता भारतीय संस्कृति का आदर्श मानी जाती है ।
७. गाय जैसी महत्त्वपूर्ण प्राणी प्रजाति का विनाश कृतघ्नता है । जिन भारतीय नस्लों की गायों को आज पश्चिमी देश मानसिक शांति, तनावमुक्ति एवं स्वास्थ्य लाभ के लिए महत्त्व दे रहे हैं, उसी देश में सरकारी संरक्षण के साथ गोमांस सेवन को बढावा देना चिंताजनक है । गीर, साहिवाल एवं देवनी जैसी देशी नस्लों की संख्या लगातार घट रही है । ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य संस्था द्वारा गोमांस सेवन को प्रोत्साहित करना एक गंभीर विषय है । इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है ।
ज्ञापन में की गई प्रमुख मांगें१. ‘भारतीय बालरोग अकादमी’ तथा वाशी महानगरपालिका चिकित्सालय में इस विवादास्पद पत्रक को अनुमति देनेवाले संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक अभियोग प्रविष्ट किए जाएं । २. नवी मुंबई क्षेत्र एवं महाराष्ट्र के सभी सरकारी चिकित्सालयों से ऐसे विवादास्पद एवं आपत्तिजनक पत्रकों को तत्काल हटाकर नष्ट करने के निर्देश दिए जाएं । यदि प्रशासन समय पर तथा ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं करता है, तो व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा, जिसका पूरा दायित्व प्रशासन का होगा । |

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