१२ ज्योतिर्लिंगों में से प्रथम दैवी सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य अंशों के विषय में जानकारी

१. ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के संस्थापक श्री श्री रविशंकरजी द्वारा बताई गई जानकारी

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के शिवलिंग के दिव्य अवशेष

१ अ. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की महिमा : ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रविशंकरजी ने बताया, ‘भारत के पवित्र १२ ज्योतिर्लिंगों में से गुजरात के सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को प्रथम शिवलिंग माना जाता है । चंद्रमा द्वारा निर्मित इस दैवी शिवलिंग की विशेषता यह है कि वह भूमि से कुछ दूरी पर अधर स्थिति में था । उसमें प्रचंड सकारात्मक आध्यात्मिक ऊर्जा है, जिसका लाभ शिवभक्तों को होता था ।

गुरुदेव श्री श्री रविशंकरजी

१ आ. ज्योतिर्लिंग पर हुए आक्रमण तथा भग्नावस्था में स्थित शिवलिंग के अवशेषों का भक्तों द्वारा किया गया संरक्षण : वर्ष १०२६ में क्रूर मुगल आक्रांता मोहम्मद गजनी ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया । उसने मंदिर ध्वस्त कर उसमें स्थित शिवलिंग के टुकडे किए । कुछ श्रद्धावान पुजारियों ने उस भग्नावस्था में स्थित शिवलिंग के अवशेषों में से कुछ अंश गुप्त रूप से सुरक्षित रखे । वे शिवलिंग के भग्नावस्था के इन अंशों को टुकडों के स्वरूप में देख नहीं सकते थे । उसके कारण उन्होंने उन अंशों को सामान्यतः शिवलिंग जैसे दिखाई देनेवाले लंबवृत्ताकार आकार दिए । इन्हीं श्रद्धावान पुजारियों ने १००० वर्षाें तक समस्त भक्तों की आस्था के केंद्र इस शिवलिंग के दिव्य अंशों को एक गुप्त स्थान पर सुरक्षित रखा । आवश्यकता पडने पर उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान देकर भी उनकी रक्षा की । आगे जाकर उनकी प्रत्येक पीढी ने उसका संरक्षण किया तथा इस रहस्य को भी बनाए रखा ।

श्री चित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी

१ इ. कांची कामकोटी पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्यजी द्वारा शिवलिंग के इन दिव्य अंशों के संदर्भ में किया गया मार्गदर्शन : वर्ष १९२४ में कांची कामकोटी पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य श्री चंद्रशेखरेंद्र सरस्वतीजी ने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य अंशों का संरक्षण करनेवाले पुजारियों को बताया था, ‘इन दिव्य अंशों को आप १०० वर्ष बाहर (समाज में) न लाएं तथा इस विषय में किसी को कुछ न बताएं ।’ उसके उपरांत के कांची कामकोटी पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य श्री जयेंद्र सरस्वतीजी ने कहा, ‘पवित्र ज्योतिर्लिंग के इस साकार दैवी अंश के विषय में अयोध्या के राममंदिर का निर्माण होने के उपरांत विचार करेंगे ।’ वर्तमान जगद्गुरु शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वतीजी ने शिवलिंग के इन अंशों को गुरुदेव श्री श्री रविशंकरजी को सौंपने के लिए कहा । उसके अनुसार श्रद्धावान पुजारियों के परिवार के अग्निहोत्री श्री. सीतारामन् गुरुजी ने इस ज्योतिर्लिंग में से कुछ दैवी अंश मुझे (गुरुदेव श्री श्री रविशंकरजी को) दिए । जगद्गुरु शंकराचार्य श्री चंद्रशेखरेंद्र सरस्वतीजी के संकल्प के अनुसार १०० वर्ष उपरांत उनके बताए अनुसार हुआ । ज्योतिर्लिंग के इन अंशों में प्रचुर ऊर्जा है, जिसके कारण उसके चारों ओर सर्वत्र चुंबकीय क्षेत्र निर्माण हुआ है । लगभग ५०० वर्ष उपरांत अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण हुआ, उसके अनुसार अब १ सहस्र वर्ष उपरांत इस (मूल) सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के अंश हमारे पास आए हैं ।’

२. गुरुदेव श्री श्री रविशंकरजी द्वारा इन दिव्य अंशों का महत्त्व जान लेकर उन्हें दर्शनार्थियों के लिए उपलब्ध करा देना

‘गुरुदेव श्री श्री रविशंकरजी ने ज्योतिर्लिंग के इन दिव्य अंशों का आध्यात्मिक महत्त्व तथा सामर्थ्य पहचाना । उन्होंने वर्ष २०२५ में महाशिवरात्रि के दिन इन दिव्य अंशों पर अभिषेक कर इन दिव्य अंशों को भक्तों के दर्शन हेतु उपलब्ध कराया ।

३. जगदगुरु शंकराचार्य, श्री श्री रविशंकरजी तथा ज्योतिर्लिंग के इन दिव्य अंशों की रक्षा करनेवाले शिवभक्तों के प्रति कृतज्ञता

भगवान शिव की अपार कृपा से ही हमें सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य अंशों के दर्शन का महासौभाग्य प्राप्त हुआ है । कांची कामकोटी पीठ के तीनों जगद्गुरु शंकराचार्याें के मार्गदर्शन के कारण ही इस आपातकाल में भी ये अंश सुरक्षित रह पाए तथा उचित समय पर वे समाज के सामने आए । इसके लिए मैं उनके चरणों में, गुरुदेव श्री श्री रविशंकरजी तथा इन दिव्य अंशों का प्राणपूर्वक संरक्षण करनेवाले श्रद्धावान पुजारियों के प्रति कोटि-कोटि कृतज्ञता व्यक्त करती हूं ।’

– श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी, तमिलनाडु.