श्री. आशीष धर एक ‘मेकैनिकल एंजिनियर’ (यांत्रिकी अभियंता) तथा सामाजिक उद्यमी हैं । (सामाजिक उद्यमी केवल लाभ के लिए कार्य नहीं करते, अपितु समाज में परिवर्तन लाना उनका मुख्य उद्देश्य होता है) श्री. आशीष धर ने भारतीय ज्ञानपरंपरा में समाहित गुलामी के प्रतीकों को मिटाकर हिन्दू संस्कृति की रक्षा हेतु समर्पित अनेक मंचों को आकार दिया है ।

अभियांत्रिकी शिक्षा से आरंभ कर उसके उपरांत वे ‘एपवर्ड फाऊंडेशन’ के सह-संस्थापक बने तथा वे ‘इंडिक कलेक्टिव ट्रस्ट’के मुख्य सदस्य भी हैं । एक प्रभावी वक्ता एवं लेखक के रूप में वे उनके शोधकार्य से प्राप्त ज्ञान का तथा कश्मीरी पंडित के रूप में प्राप्त जीवन के अनुभवों का उपयोग कर प्रचालित उपनिवेशवादी तथा आधुनिक झूठी कथाओं का (नैरेटिवज) का सामना करने हेतु, साथ ही पूरे विश्व के सामने हिन्दुत्व का सच्चा रूप आने हेतु कार्य कर रहे हैं ।
विशेष स्तंभ

छत्रपति शिवाजी महाराज के हिन्दवी स्वराज हेतु उनके वीर योद्धाओं ने जो त्याग किया था, वह सर्वोच्च है, उसी प्रकार से वर्तमान समय में भी अनेक हिन्दुत्वनिष्ठ एवं राष्ट्रप्रेमी नागरिक धर्म-राष्ट्र की रक्षा हेतु ‘वीर योद्धा’ के रूप में कार्य कर रहे हैं । उनकी तथा उनके हिन्दू धर्मरक्षा हेतु के संघर्ष की जानकारी करानेवाले ‘हिन्दुत्व के वीरयोद्धा’, इस स्तंभ के द्वारा अन्यों को भी प्रेरणा मिलेगी तथा इन उदाहरणों से आपके मन की चिंता दूर होकर उत्साह उत्पन्न होगा ! – संपादक
१. शिक्षा
श्री. आशीष धर ने सामाजिक कार्य की ओर मुडने से पूर्व ‘वेल्लोर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी’से ‘मेकैनिकल एंजिनियरिंग’ में ‘बैचलर ऑफ टेक्नॉलॉजी’ (प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में स्नातक) की उपाधि प्राप्त की है । उनकी तांत्रिक शैक्षणिक पृष्ठभूमि, विश्लेषण करने का उनका कौशल तथा परियोजना व्यवस्थापन के कारण वे ज्ञान का प्रसार करनेवाले मंच विकसित कर पाए ।
२. एपवर्ड फाऊंडेशन

अगस्त २०१८ में श्री. आशीष ने ‘एपवर्ड फाऊंडेशन’की सह-स्थापना की । ‘एपवर्ड फाऊंडेशन’ नई देहली स्थित एक न लाभ तथा न घाटा के आधार पर करनेवाली मीडिया (माध्यम) संस्था है, जो वैश्विक एवं सांस्कृतिक चुनौतियों पर सूक्ष्मता से किए गए शोधकार्याें के छोटे-छोटे वीडियोज बनाता है । इन वीडियोज को बनाने की प्रक्रिया में संस्थापक एवं निदेशक के रूप में वे नीतिगत दृष्टिकोण सुनिश्चित करते हैं तथा उसके लिए आवश्यक जानकारी इकट्ठा करते हैं । वे संबंधित विषय के विशेषज्ञों, पत्रकारों तथा विद्वानों से बात कर विभिन्न लेखन की मार से सुयोग्य ज्ञान उत्पन्न करते हैं । उनके नेतृत्व में एपवर्ड ने ‘पीनपॉईंट’, ‘आइडियाज’, ‘डीप डाइव’ इत्यादि प्रमुख धारावाही प्रकाशित की हैं, जो आधुनिक भाषा में शाश्वत सांस्कृतिक मूल्यों पर गहन विचार रखते हैं ।
| Hindu Unity Ki Baat Chhodo, Pehle Hindu Bano – Kashmir After 370 | w/ Ashish Dhar | TAMS 178
(सौजन्य : Awaara Musaafir) |
३. ‘प्रग्याता’ : मानसिक गुलामी से मुक्ति !
श्री. आशीष धर ने ‘प्रग्याता’नामक एक ‘ऑनलाइन जर्नल’ की सह-स्थापना की । ‘प्रग्याता’उपनिवेशवादी तथा मार्क्सवादी चौखटों को चुनौती देनेवाले भारतीय सभ्यता, इतिहास, संस्कृित एवं धर्म पर आधारित निबंधों का प्रकाशन कर रहा है । भारत को उसकी बौद्धिक धरोहर पुनः प्राप्त कराने के उद्देश्य से श्री. आशीष धर जातिव्यवस्था, पर्यावरण, आधुनिक इतिहास के लेखन में समाहित त्रुटियां जैसे समग्र विषयों पर आधारित लेखों का संकलन करते हैं । ‘मुख्य प्रवाह की जानकारी की मार को वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रदान करना’ ‘प्रग्याता’का मुख्य उद्देश्य है ।
४. ‘इंडिक कलेक्टिव ट्रस्ट’का कार्यवाहक नेतृत्व
जून २०१७ से श्री. आशीष धर ने ‘इंडिक कलेक्टिव ट्रस्ट’में ३ वर्षाें तक ‘ऑपरेशंस हेड’ (कार्यवाहक नेतृत्व) के रूप में काम किया । इस पद पर रहते हुए उन्होंने भारतीय शास्त्रों के पुनर्जागरण पर ध्यान केंद्रित किए गए कानूनी उपक्रमों तथा अभियानों का समर्थन करने हेतु उनका प्रसार करना, समन्वय करना, ‘आईटी’ की (सूचना प्रौद्योगिकी) की दृष्टि से मौलिक सुविधाओं तथा पर्दे के पीछे के सभी कार्य सुचारू रूप से चलने हेतु सुव्यवस्थापन किया । उनके संगठनात्मक कौशल के कारण जमीनी स्तर के आंदोलनों तथा विद्वत्तापूर्ण प्रयासों में संगठन खडा हुआ है, साथ ही इसमें सभी के प्रयास प्रभावी पद्धति से हो रहे हैं ।
५. वैचारिक नेतृत्व तथा सामाजिक सहभाग

श्री. आशीष धर एक लोकप्रिय वक्ता तथा विभिन्न परिचर्चाओं के सदस्य हैं । वे नियमितरूप से परिषदों, वेबिनार तथा मल्टीमीडिया के मंचों पर हिन्दुओं का वास्तविक परिचय, सांस्कृतिक अस्तित्व एवं ब्राह्मण, कश्मीरी पंडितों का उत्पीडन जैसे विषयों का विश्लेषण करने के लिए उपस्थित रहते हैं । यू ट्यूब पर उनके भाषण, जैसे कि ‘कश्मीर : अतीत, वर्तमान एवं भविष्य’ ये उनके व्यक्तिगत अनुभवों तथा इतिहास का यथार्थ मेल है तथा विस्थापन के कारण सहन करने पडनेवाली पीडाओं पर वे प्रकाश डालते हैं । वे सामाजिक माध्यमों पर दर्शकों से परंपरा एवं आधुनिकता के मध्य के समन्वय के विषय में विभिन्न दर्शकों से संवाद करते हैं ।
६. व्यक्तिक पृष्ठभूमि एवं प्रभाव
कश्मीरी पंडित परिवार में जन्में श्री. आशीष धर ने अपने स्वयं के घर से तथा अपने प्रांत से विस्थापित होना क्या होता है, इसका अनुभव किया है । यह व्यक्तिगत संबंध उपनिवेशवाद की धरोहर की की जानेवाली आलोचना को बल देता है तथश हिन्दू संस्कृति की रक्षा हेतु विभिन्न समुदायों को एकत्र करने के उनके प्रयासों को और तीव्र बनाता है । ‘एपवर्ड’ एवं ‘प्रग्याता’ के माध्यम से वे पाठकों को तथा दर्शकों को संस्थात्मक पूर्वग्रह का (इंस्टिट्यूशनलाईज्ड प्रीज्युडाईस) का सामना करने हेतु तथा हिन्दू संस्कृति के उज्ज्वल भविष्य हेतु जानकारीपूर्ण मोर्चा तैयार होने हेतु सुसज्जित कर रहे हैं ।
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