
लोकसभा एवं राज्यसभा द्वारा पारित वक्फ संशोधन विधेयक पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के उपरांत यह कानून बन गया है । वक्फ संशोधन विधेयक पारित होने पर कुछ नेताओं ने भले ही इसे पारदर्शी तथा सुधार की ओर बढाया हुआ कदम कहा है, तब भी उसके विरोधी अपनी भूमिका पर अडे हुए हैं कि इस संशोधन विधेयक से वक्फ संपत्तियों की स्वायत्तता एवं व्यवस्थापन पर मर्यादाएं आएंगी । जिस भूमि की ओर उंगली दिखाई जाएगी, उस भूमि को वक्फ में समाहित कर लेने की वक्फ बोर्ड की मनमानी के कारण पिछले २-३ वर्षाें में भारत हिल गया । सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी, स्वयं केंद्रीय गृहमंत्री, अनेक मंत्री, हिन्दुत्वनिष्ठ संगठन तथा उनके कार्यकर्ताओं ने वक्फ कानून में कैसे पारदर्शिता नहीं है तथा कैसे वह मुस्लिम समुदाय का तुष्टीकरण करता है ?, भारत की जनता के समक्ष इसके अनेक तथ्य रखे । वक्फ बोर्ड ने महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश में अनेक संपत्तियां हडप ली हैं । इसकी अनेक शिकायतें भी सामने आई हैं । रेल विभाग तथा सेना के उपरांत भारत की सर्वाधिक भूमि जिसके पास है, उस वक्फ बोर्ड के पास अनेक लाख एकड भूमि होते हुए भी उससे मिलनेवाली आय बहुत ही अल्प है, यह बात हर भारतीय के मन में संदेह उत्पन्न करती है ।
आज की स्थिति में देश में जिसके पास भूमि है, उसे धनवान माना जाता है । महाराष्ट्र के अनेक जमींदारों ने उनकी भूमि विकसित कर तथा उन्हें बेचकर प्रचुर संपत्ति अर्जित की है । कुछ समय पूर्व पंढरपुर देवस्थान के निकट की भूमि का दुरुपयोग होने की तथा उससे किसी प्रकार की आय न मिलने की शिकायत की गई तथा इस विषय को खंगालने पर पंढरपुर मंदिर की १ सहस्र २०० एकड भूमि होने की बात सामने आई थी । ‘पंढरपुर के विठ्ठल मंदिर के पास यदि इतनी भूमि है, तो यह मंदिर तिरुपति मंदिर जितना धनवान है’, ऐसा माननेवाले लोग वक्फ की संपत्ति का इतना बडा आंकडा देखकर वक्फ बोर्ड कितना भ्रष्टाचार कर रहा है, इसके विषय में एक शब्द भी नहीं बोलते । केवल महाराष्ट्र में ही वक्फ बोर्ड के पास अनुमानित १ लाख एकड भूमि है । इस बोर्ड को महाराष्ट्र सरकार से प्रतिवर्ष कार्यालयीन खर्च, उसके पदाधिकारियों के लिए ईंधन तथा कर्मचारियों के वेतन के लिए सरकारी तिजोरी से पैसे दिए जाते हैं । सरकार के नियंत्रण में हिन्दुओं के देवस्थान जालस्थलों पर उनका लेखा परीक्षण प्रकाशित करते हैं; परंतु महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड ने पिछले १७ वर्षाें से सरकार को लेखा परीक्षण ब्योरे प्रस्तुत ही नहीं किए हैं । इसमें दुर्भाग्य की बात यह है कि इस विषय में सरकार ने भी बोर्ड से नहीं पूछा । ऐसी अनेक अनियमितताओं के लिए वक्फ बोर्ड तथा उसकी संपत्ति का विषय चर्चा में रहा । वक्फ के विषय में लोगों को खुली चर्चा करने का अवसर दिया गया तथा उसपर उस प्रकार से चर्चा हुई भी । देश का यह चित्र प्रशंसनीय है । अंततः लोक दबाव के कारण यह संशोधन विधेयक पारित हुआ ।

विधेयक में पूर्णता हो,यही हिन्दुओं की अपेक्षा है !
इस संशोधन विधेयक द्वारा वक्फ की मनमानी पर नियंत्रण रखने हेतु अनेक प्रावधान रखे गए हैं । यह विधेयक वर्ष १९९५ के कानून में संशोधन करने की तथा भारत में वक्फ की संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार लाने की दृष्टि से है । पिछले कानून में जो त्रुटियां थीं, उन्हें दूर करना तथा वक्फ की प्रविष्टियों को व्यवस्थापित करने में प्रौद्योगिकी की भूमिका बढाने में इस विधेयक को उद्देश्य माना जाता है । इस संशोधन विधेयक के अनुसार वक्फ की व्याख्या में परिवर्तन किया गया है । वक्फ द्वारा सर्वेक्षण एवं प्रविष्टियों में अनेक नियंत्रण लाए गए हैं । वक्फ न्यायाधीकरण की रचना बदल दी गई है । इसमें अनुच्छेद ४०, १०७ तथा १०८ निरस्त कर दिए गए हैं । भले ही ऐसा हो, तब भी कुछ बिंदु उपेक्षित हैं, जिन्हें हिन्दुत्वनिष्ठों ने उठाया था । वक्फ संपत्ति के रूप में घोषित तथा अज्ञानवश घोषित की गई संपत्तियों को वापस लेने का इसमें कोई भी प्रावधान नहीं है । अनुच्छेद ६ में धारा २८, २९ तथा ‘पीडित व्यक्ति’ जैसे कुछ कठोर प्रावधान अभी भी हैं, जिन्हें हटाया नहीं गया है । इस विधेयक को पूर्व लक्ष्यित प्रभाव से लागू नहीं किया गया है, अतः अब तक वक्फ ने जो भूमि हडपी हुई है, उन्हें वापस लेने के लिए प्रयास नहीं किए जा सकते । इसीलिए वक्फ संशोधन विधेयक में किए गए संशोधनों को और प्रभावशाली बनाने का अवसर है तथा इस विधेयक में पूर्णता लाई जाए, यह हिन्दुओं की अपेक्षा है ।

देश में अराजकता उत्पन्नकरने के प्रयासों की बढी हुई संभावना
‘भारत-पाकिस्तान के विभाजन के समय भारत से जो मुसलमान पाकिस्तान गए, उनकी भूमि हम संभालेंगे’, ऐसा भारत सरकार ने कहा था तथा जो संपत्तियां वक्फ बोर्ड के पास जमा हुईं, उसी समय पाकिस्तान से जो हिन्दू भारत आए, उनकी संपत्तियां हडप ली गईं । वो संपत्तियां पाकिस्तान में रह रहे हिन्दुओं को भी नहीं मिलीं । भारत सरकार स्वतंत्रता से लेकर वक्फ की इन संपत्तियों को जी जान से संभाल रही है तथा उसमें प्रतिदिन वृद्धि भी हो रही है । ‘वक्फ संशोधन की ओर धर्म के दृष्टिकोण से न देखें, वह भ्रष्टाचार रोकने का मार्ग है’, भले ही ऐसा कहा जा रहा है; परंतु उनकी ओर धर्म के दृष्टिकोण से देखा जाना अत्यंत आवश्यक है । इसका कारण यह कि वक्फ संशोधन विधेयक को ‘इस्लाम पर सीधा आक्रमण’ कहा जा रहा है । जितने बडे स्तर पर इस्लामी विचारकों तथा समस्त मुस्लिम समुदाय ने इस विधेयक का तीव्र्र विरोध किया, अब उतने स्तर पर उसकी प्रतिक्रियाएं व्यक्त होती हुई दिखनेवाली हैं । इसकी पहली घटना संभल में हो भी चुकी है । जाहिद सैफी नामक मुसलमान द्वारा संशोधन विधेयक का समर्थन करने पर लाठियों तथा धारदार हथियारों से गुंडों ने उस पर आक्रमण किया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया । ‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ के महासचिव फजलुर रहीम मुजद्दीदी ने तो यह धमकी भी दी थी कि ‘वक्फ संशोधन कानून लागू किया गया, तो पूरे देश में शाहीन बाग जैसी स्थिति होगी ।’
समाजवादी दल, द्रमुक तथा मुसलमानों का तुष्टीकरण करनेवाले अन्य दलों के साथ कांग्रेस ने इस संशोधक विधेयक को बार-बार ‘संविधान विरोधी’, ‘मुसलमान विरोधी’ तथा ‘लोकतंत्र विरोधी’ कहा है । उनके इन आक्षेपों के पीछे भले ही कोई विश्वसनीय तर्क नहीं है, तब भी इस संबंध में दिए गए भडकाऊ वक्तव्य, झूठी कहानियां तथा मुसलमानों को दिखाया जा रहा भय, इस संदर्भ में उनकी इस रणनीति को देखा जाए, तो वर्ष २०२० में देश में नागरिकता संशोधन कानून पारित होने के समय देहली में हुए हिन्दू विरोधी दंगे या हिंसक किसान आंदोलन को भुलाया नहीं जा सकता । इसीलिए पूरे देश में शांति स्थापित होने के लिए वक्फ संशोधन विधेयक को हिन्दुओं के पक्ष में पूर्णता प्रदान की जाए, यही हिन्दुओं की अपेक्षा है ।
संपादकीय भूमिकापूरे देश में शांति स्थापित होने के लिए वक्फ संशोधन विधेयक को हिन्दुओं के पक्ष में पूर्णता प्रदान की जाए, यही हिन्दुओं की अपेक्षा है ! |
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