प.पू. डॉक्टरजी का अवतारत्व सिद्ध करनेवाली उनकी गुणविशेषताएं !
प.पू. डॉक्टरजी का स्वयं के प्रत्येक विचार एवं कृति की ओर ध्यान होना तथा उनके द्वारा उसी क्षण ही उचित विचार एवं कृति की जाना
प.पू. डॉक्टरजी का स्वयं के प्रत्येक विचार एवं कृति की ओर ध्यान होना तथा उनके द्वारा उसी क्षण ही उचित विचार एवं कृति की जाना
‘केवल भारत में ही नहीं, अपितु पृथ्वी पर सर्वत्र ‘हिन्दू राष्ट्र (ईश्वरीय राज्य, सनातन धर्म राज्य, रामराज्य) स्थापित करना’, यह केवल राजनीतिक, सांस्कृतिक, वांशिक अथवा भौगोलिक प्रक्रिया नहीं है, अपितु वह मुख्य रूप से आध्यात्मिक प्रक्रिया है’, यह उन्होंने समय-समय पर स्पष्ट किया है । इसके लिए वे ८३ वर्ष की आयु में भी कार्यरत हैं !
समर्थ रामदासस्वामीजी, स्वामी विवेकानंदजी, महर्षि अरविंदजी तथा सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी इन ४ संतों की जन्मकुंडलियों के ग्रहयोगों का विश्लेषण निम्नलिखित लेख में किया गया है, साथ ही इस अध्ययन से ज्ञात हुए सूत्र अंत में दिए गए हैं ।’
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत बाळाजी आठवलेजी (गुरुदेवजी) का यह संक्षिप्त चरित्र ! ‘अखिल मानवजाति को गुरुदेवजी का माहात्म्य ज्ञात हो तथा उनकी सीख के अनुसार साधना कर सब आनन्दित हो’, यह इस लेख का प्रधान हेतु है ।
इस लेख में सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के ‘ज्ञानगुरु’ के रूप में दैवी कार्य का विस्तृत विवेचन किया गया है ।