जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज की पालकी का भक्तिमय वातावरण में देहू से प्रस्थान !

नये रजत रथ से पादुकाओं का समारोह !

देहू (जिला पुणे) – ‘ज्ञानोबा-तुकाराम’ तथा ‘विठ्ठल-विठ्ठल’ के अखंड जयघोष तथा ताल-मृदंग की ध्वनि में जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज के ३४१ वें आषाढी पैदल वारी पालकी समारोह का ७ जुलाई को श्री क्षेत्र देहू से अत्यंत भक्तिमय वातावरण में प्रस्थान हुआ । दोपहर २ से ४ बजे के मध्य विधिवत पूजा संपन्न हुई । इस समारोह में राज्यभर से आए लाखों वारकरियों सहित प्रमुख गणमान्य व्यक्ति एवं श्रद्धालु उपस्थित थे । संपूर्ण देहूनगरी प्रस्थान समारोह के कारण भक्तिचैतन्य में लीन हो गई थी । पालकी का प्रथम विश्राम देहू के ही इनामदार वाडे में होगा ।

प्रस्थान समारोह का प्रारंभ प्रातःकाल ५ बजे से हुआ । शिला मंदिर, तपोनिधि नारायण महाराज समाधी मंदिर में न्यासियों (विश्वस्तों) की ओर से महापूजा संपन्न हुई । इनामदार वाडे में जगद्गुरु तुकोबा की पादुकाओं का पूजन हुआ । तदोपरांत प्रात: १० से दोपहर १२ बजे के मध्य देहूकर महाराज का कालिया कीर्तन हुआ ।

ब्रह्मवृंद की उपस्थिति में मंत्रघोष के साथ पादुका पूजन !

दोपहर ढाई बजे इनामदार वाडे से महाराज की पादुकाएं देऊळवाडा के भजनी मंडप में आईं । तत्पश्चात प्रस्थान समारोह के कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ । इस अवसर पर आई हुई दिंडियों (भजन मंडलियों) को मंदिर में प्रवेश दिया गया । ब्रह्मवृंद की गरिमामयी उपस्थिति में मंत्रघोष के साथ पादुका पूजन किया गया । रजत सिंहासन पर, रजत थाली में रजत पादुकाओं का अभिषेक संपन्न हुआ । उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, शिवसेना के सांसद श्रीरंग बारणे, पूर्व सांसद छत्रपति संभाजीराजे, राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायक सुनील शेळके, भाजपा के विधायक महेश लांडगे के कर-कमलों द्वारा पादुकाओं का पूजन किया गया । दोपहर ४ बजकर २ मिनट पर पालकी ने प्रस्थान किया ।

प्रथम बार नये रजत रथ से पालकी का प्रस्थान !

इस वर्ष की वारी की एक अन्य विशेषता यह है कि जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज की पादुकाएं प्रथम बार नवनिर्मित रजत रथ में विराजमान होंगी । इस नये रथ का भार (वजन) पूर्व रथ की तुलना में ६०० किलोग्राम न्यून (कम) किया गया है ।

इनामदार वाडे में पालकी समारोह का विश्राम !

सायं ५ बजे पालकी की प्रदक्षिणा पूर्ण होने के उपरांत, पालकी इनामदार वाडे की ओर प्रस्थान कर गई तथा रात्रि में इनामदार वाडे में ही पालकी समारोह का मुकाम (विश्राम) रहेगा । इसके पश्चात पालकी आकुर्डी, पुणे नगर (नाना पेठ, निवडुंगा विठोबा मंदिर), लोणी कालभोर होते हुए आगे पंढरपुर की ओर अग्रसर होगी ।

वर्षा का विराम !

इंद्रायणी नदी के बढते जलस्तर एवं मूसलाधार वर्षा को दृष्टिगत रखते हुए जिला प्रशासन एवं दोनों देवस्थान संस्थानों ने वारकरियों से यह आवाहन किया था कि वे देहू तथा आलंदी में भीड न करते हुए सीधे पुणे, पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका की सीमा से अथवा उसके आगे के मार्ग से पालकी समारोह में सम्मिलित हों ; किंतु ७ जुलाई को प्रात:काल से ही वर्षा रुक गई थी । अत: वारकरी अत्यधिक संख्या में देहू पधारे थे ।