गांव में श्मशान भूमि के बिना अन्य विकास कार्यों के लिए निधि नहीं मिलेगी ! – जयकुमार गोरे, ग्राम विकास मंत्री
विधानसभा प्रश्नोत्तर l

मुंबई, ८ जुलाई (वार्ता.) – महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों के गांवों में से लगभग ७ सहस्र ४४४ गांवों में अभी तक श्मशान भूमि उपलब्ध नहीं है । निकटतम २० प्रतिशत गांवों को इस मूलभूत सुविधा से वंचित रहना पड रहा है । इस कारण से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में अंत्येष्टि की गंभीर परिस्थिति एवं श्मशान भूमियों के अभाव पर विधानसभा में तारांकित प्रश्नोत्तर के घंटे के प्रश्नों पर अनुमानतः ४० मिनट चर्चा हुई । विधायकों द्वारा इस प्रश्न पर आवाज उठाने के पश्चात ‘जिस गांव में श्मशान भूमि उपलब्ध होने का प्रमाणपत्र नहीं होगा, उस गांव को अन्य किसी भी विकास कार्य के लिए शासकीय निधि स्वीकृत नहीं की जाएगी’, ऐसा निर्णय राज्य सरकार ने लिया है तथा उस संदर्भ में अध्यादेश लागू कर दिया गया है, ऐसी जानकारी ग्राम विकास मंत्री जयकुमार गोरे ने ८ जुलाई को दी ।
विधानसभा में मारेगांव (जिला यवतमाल) तहसील की श्मशान भूमियों की दुर्व्यवस्था के विषय में विधायक संजय देरकर ने तारांकित प्रश्न उपस्थित किया था । श्मशान भूमि अथवा अंत्येष्टि के लिए छत उपलब्ध न होने के कारण अंत्येष्टि करने के लिए नागरिकों को नदी-नालों के तट पर, खुले में अथवा निजी भूमि पर निर्भर रहना पडता है । वर्षा ऋतु के दिनों में तो खुले में अंत्येष्टि करते समय वृष्टि के कारण प्रज्वलित चिता के बुझ जाने की अत्यंत दुखदायक घटनाएं घटित होती हैं । इससे मृत व्यक्ति के अंतिम संस्कार में विघ्न उत्पन्न होकर संबंधियों तथा ग्रामीणों को तीव्र मानसिक एवं सामाजिक कष्ट सहन करना पडता है, इस विषय पर विधायकों ने चिंता व्यक्त की ।
इसका उत्तर देते हुए ग्राम विकास मंत्री जयकुमार गोरे ने कहा कि जिन गांवों में श्मशान भूमि के लिए स्थान नहीं है, वहां स्थान कैसे उपलब्ध कराया जा सकता है ?, इसका विस्तृत प्रतिवेदन (रिपोर्ट) तैयार करने के निर्देश सभी जिलाधिकारियों को दिए जा रहे हैं । भूमियों का अधिग्रहण कर स्थान उपलब्ध कराने के लिए नीति बनाने की आवश्यकता है । इसके लिए क्या ‘गायरान’ (शासकीय चरागाह) भूमि दी जा सकती है ? अथवा निकटवर्ती ५-६ गांवों का समूह बनाकर ‘सामुदायिक श्मशान भूमि’ विकसित की जा सकती है ? इस पर भी सरकार विचार कर रही है । जिन गांवों में स्थान उपलब्ध है, वहां जिला परिषद शेष निधि से, साथ ही पालक मंत्री के स्तर से निधि उपलब्ध कराकर छत का निर्माण एवं मूलभूत सुविधाएं प्राथमिकता से पूर्ण की जाएंगी ।
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