महाराष्ट्र के १८१ महाविद्यालयों में न्यूनतम शैक्षणिक सुविधाओं का अभाव उजागर !

  • विश्वविद्यालयों से संबद्ध महाविद्यालयों में प्राध्यापकों, पुस्तकालयों, प्रयोगशालाओं आदि की भारी कमी l

  • नागपुर एवं छत्रपति संभाजीनगर संभागों में ऐसे महाविद्यालयों की संख्या सर्वाधिक l

प्रतिकात्मक चित्र

श्री. सचिन कौलकर, विशेष प्रतिनिधि, सनातन प्रभात

मुंबई – विगत ३ वर्षों में राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों से संबद्ध १८१ महाविद्यालयों में पात्र प्राध्यापक वर्ग, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय एवं कम छात्र संख्या जैसी अनिवार्य शैक्षणिक सुविधाओं का अभाव होने की बात प्रकाश में आई है । इसमें नागपुर, अमरावती, छत्रपति संभाजीनगर तथा पुणे संभाग अग्रणी हैं, यह जानकारी उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने ९ जुलाई को पूछे गए एक तारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में दी । विधान परिषद के सदस्य निरंजन डावखरे, सदस्य प्रवीण दरेकर, सदस्य प्रसाद लाड एवं अन्य सदस्यों ने इस विषय में तारांकित प्रश्न उपस्थित किया था ।

शासकीय सूचना के अनुसार विगत ३ वर्षों में सत्यापन के समय विश्वविद्यालयों की संबद्धता होने के उपरांत भी भौतिक सुविधाओं तथा पात्र शिक्षकों से विहीन महाविद्यालयों में छत्रपति संभाजीनगर संभाग में ८२ महाविद्यालय, नागपुर संभाग में ४१ महाविद्यालय, पुणे संभाग में २४, अमरावती संभाग में २३, नासिक संभाग में ९ महाविद्यालय तथा कोंकण संभाग में २ महाविद्यालय सम्मिलित हैं ।

नियमों का उल्लंघन करने वाले महाविद्यालयों पर विश्वविद्यालय स्तर पर कार्रवाई गतिशील !

इस संदर्भ में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि, ‘महाराष्ट्र सार्वजनिक विश्वविद्यालय अधिनियम, २०१६’ की धारा १०८, ११७ एवं १२० के अंतर्गत ऐसे महाविद्यालयों के परिसरों का भौतिक सत्यापन किया जाता है । जिन महाविद्यालयों ने मानदंडों की पूर्ति नहीं की है, उनके विरुद्ध विश्वविद्यालय स्तर पर संबद्धता समाप्त करने अथवा निरस्त करने जैसी वैधानिक कार्रवाई की जा रही है ।

संपादकीय भूमिका

पर्याप्त सुख-सुविधाओं तथा प्राध्यापकों के बिना भी केवल लाभार्जन (लाभ) के लिए महाविद्यालयों का संचालन करना, विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किया गया द्रोह ही है । ऐसे महाविद्यालयों की मान्यता तत्काल निरस्त कर संबंधितों के विरुद्ध आपराधिक अभियोग (फौजदारी मुकदमे) पंजीकृत किए जाने चाहिए !