आगामी अधिवेशन में मंदिरों की भूमि से संबंधित अधिनियम लाया जाएगा ! – चंद्रशेखर बावनकुळे, राजस्व मंत्री

चंद्रशेखर बावनकुळे, राजस्व मंत्री

मुंबई – मंदिरों की (उपहार) भूमियों से संबंधित प्रश्नों के निराकरण हेतु शीघ्र ही एक अधिनियम लाया जाएगा तथा नागरिकों को सूचनाएं एवं आपत्तियां प्रविष्ट करने के लिए आगामी ३ दिनों में उसका प्रारूप शासकीय आधिकारिक जालस्थल (वेबसाइट) पर प्रकाशित होगा । जुलाई मास में यह अधिनियम पूर्णतः लागू हो जाएगा । महाराष्ट्र के साढे चार लाख मंदिरों की भूमि के हस्तांतरण से संबंधित यह अधिनियम है । रत्नागिरी जिले के चिपळूण तहसील के ऐतिहासिक पेढे परशुराम देवस्थान के संदर्भ में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे के कक्ष में संपन्न हुई बैठक में उन्होंने यह जानकारी दी ।

देवस्थान भूमियों के विषय में स्थायी समाधान निकालने हेतु सरकार सकारात्मक है । नये अधिनियम की प्रक्रिया कार्यान्वित करते समय लोकभावना एवं तकनीकी विषयों पर विचार किया जाएगा । सामान्य नागरिक एवं संबंधित पक्षकार अपना मत प्रस्तुत कर सकें, इसके लिए यह जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी, ऐसा भी बावनकुळे ने कहा ।

महाराष्ट्र मंदिर महासंघ ने इसके लिए विगत ढाई वर्षों से संघर्ष किया है ! – सुनील घनवट, अध्यक्ष, अखिल भारतीय मंदिर महासंघ

देवस्थान भूमियों से संबंधित ‘ एंटी लैंड ग्रैबिंग ’ ( भूमि हस्तांतरण ) अधिनियम लाने हेतु विगत ढाई वर्षों से महाराष्ट्र मंदिर महासंघ द्वारा प्रयास किए जा रहे थे । निर्माण व्यवसायी, राजस्व विभाग के अधिकारी एवं न्यासियों (ट्रस्टी) की मिलीभगत से मंदिरों की शत-प्रतिशत एकड भूमि हडप ली गई है । अकोला के सोमेश्वर महादेव संस्थान की ५० करोड रुपयों की भूमि मात्र ९६० रुपयों में विक्रय करने का आदेश प्रातः निकलता है तथा संध्याकाल तक भूमि का विक्रय हो जाता है । विजय लोखंडे नामक तहसीलदार की सहायता से यह सब हुआ । वे अभी भी सेवा में कैसे हैं ?, ऐसा प्रश्न उपस्थित होता है ।

तेल्हारा (जिला अकोला) स्थित बालाजी संस्थान देवस्थान के स्वामित्व की भूमि न्यासियों द्वारा हडपने का आरोप !

तेल्हारा (जिला अकोला) स्थित बालाजी संस्थान देवस्थान के स्वामित्व की कृषि गट क्र.५ की साढे चार एकड क्षेत्रफल वाली ३० करोड रुपयों की भूमि केवल १० सहस्र रुपयों में स्वयं के एवं परिजनों के नाम पर न्यासियों ने करवा ली । यह भूमि ‘ मध्य प्रदेश पब्लिक ट्रस्ट ’ के अंतर्गत पंजीकृत है । प्रथम न्यासियों की मृत्यु के पश्चात विभिन्न परिवारों के व्यक्ति न्यासी बन गए हैं ।

७/१२ के अभिलेखों में संस्थान के नाम की प्रविष्टि है । उससे यह प्रकरण प्रकाश में आया । प्रपत्रों में हेरफेर करने का एवं राजस्व विभाग के तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत से यह कृत्य करने का ग्रामवासियों तथा शिकायतकर्ताओं का आरोप है । गवांदे एवं खंदारे नामक अधिकारी उस समय वहां कार्यरत थे, ऐसा शिकायतकर्ताओं का कथन है । इस संदर्भ में न्यायालयीन संघर्ष चल रहा है ।

इस विषय में दायमा ने कृषक अधिनियम (कुळकायदा) के अंतर्गत भूमि नाम पर करने का दावा किया है । अकोट के तत्कालीन अधिकारियों द्वारा इस भूमि के विक्रय की अनुमति दिए जाने की जानकारी उन्होंने दी । ‘ साम टीवी ’ समाचार वाहिनी ने इस प्रकरण का समाचार प्रसारित किया है ।