भोपाल – मध्य प्रदेश सरकार मंदिर प्रबंधन पाठ्यक्रम आरंभ करने की तैयारी में है, जिससे विवाद उत्पन्न हो गया है । यह पाठ्यक्रम सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में ‘एमबीए’ के विद्यार्थियों के लिए आरंभ किया जाएगा । सरकार इस पाठ्यक्रम को धार्मिक पर्यटन एवं रोजगार से जोड रही है, जबकि विपक्ष इस पर प्रश्न उठा रहा है । कांग्रेस के नेता एवं पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार धार्मिक उद्देश्य साध रही है । (देश में लाखों मंदिर हैं, जिनमें करोडों रुपए का लेन-देन होता है । इसके माध्यम से युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना शासन का कर्तव्य है । इसे धार्मिकता से जोडकर कांग्रेस ही ‘मुसलमानों का तुष्टिकरण’ करने का अपना वास्तविक एजेंडा चला रही है, ऐसा कहा जाए तो असत्य नहीं होगा ! – संपादक)
१. राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि इस पाठ्यक्रम से मंदिरों का प्रबंधन अधिक सशक्त होगा एवं युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे ।
२. उज्जैन में बडी संख्या में मंदिर होने के कारण इसी स्थान से इस पाठ्यक्रम की आरंभ किया जा रहा है । विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, अब तक मंदिरों का प्रबंधन पारंपरिक रूप से होता था; परंतु अब इसे वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक रूप से सिखाया जाएगा ।
३. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अर्पण भारद्वाज ने बताया कि जुलाई से आरंभ होनेवाले इस पाठ्यक्रम के लिए आवेदन प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है ।
४. मध्य प्रदेश में ‘एमबीए टेंपल मैनेजमेंट’ पाठ्यक्रम आरंभ करनेवाला सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय पहला विश्वविद्यालय होगा ।
संपादकीय भूमिकापाठ्यक्रम में हिन्दू धर्म से संबंधित किसी भी विषय को सम्मिलित किया जाए, तो कांग्रेस को आपत्ति होती है । इसलिए उसने इसका विरोध किया, तो इसमें आश्चर्य नहीं ! |

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