बांग्लादेशी घुसपैठिए एवं शौर्यविहीन हिन्दू !

‘सनातन प्रभात’ के प्रतिनिधि श्री. विक्रम डोंगरे ने देहली के प्रसिद्ध फिल्म निर्माता एवं निर्देशक तथा हिन्दुत्वनिष्ठ श्री. मयंक जैन के साथ ‘बांग्लादेश से होनेवाली घुसपैठ, विभिन्न राष्ट्रीय समस्याएं तथा हिन्दुओं की दुर्दशा’ जैसे विभिन्न विषयों पर भेंटवार्ता की । उस पर आधारित लेख पाठकों के लिए प्रकाशित कर रहे हैं ।

१. सर्वदलीय शासनकर्ताओं द्वारा बांग्लादेशी घुसपैठ की अनदेखी

हम वर्ष २००४ में ‘द बांग्ला क्रिसेंट : आई.एस.आई., मदरसा, इंफिल्ट्रेशन’ फिल्म बना रहे थे तथा वर्ष २००५ में वह प्रदर्शित हुई । उससे पूर्व पू. सीताराम गोयलजी ने मुझे त्रिपुरा के पुलिस महानिरीक्षक बलजीत राय द्वारा लिखित ‘डेमोग्राफिक एग्रेशन एगेंस्ट इंडिया’ पुस्तक दी । उन्होंने मुझे बताया था कि ‘बांग्लादेशी घुसपैठ पर काम होना चाहिए’ । तब से मेरे मन में यह विषय चल रहा था । वह कांग्रेस का कार्यकाल था । देहली में बडी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए रह रहे थे । वर्ष २०१३ में पुलिस ने देहली उच्च न्यायालय में यह शपथपत्र प्रस्तुत किया था कि ‘देहली में १३ लाख बांग्लादेशी रह रहे हैं ।’ इसका समाचार ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने प्रकाशित किया था । वे खुलेआम उनके बांग्लादेशी होने की बात कह रहे थे । उन्हें किसी का भय नहीं था । कांग्रेस की सरकार होने के कारण इन घुसपैठियों के विरुद्ध कोई भी कार्रवाई नहीं की गई । उसके उपरांत सत्तापरिवर्तन हुआ । भाजपा के सत्ता में आने से लेकर देश की सुरक्षा में लक्षणीय वृद्धि हुई । उसकी तुलना कांग्रेस के साथ की ही नहीं जा सकती; परंतु वर्तमान प्रशासन ने भी बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने के लिए विशेष कुछ किया हुआ दिखाई नहीं दिया है ।

५ वर्ष पूर्व नोएडा की एक सोसाइटी में एक बांग्लादेशी कामवाली चोरी करते हुए पकडी गई । लोगों ने उसे एक कक्ष में बंद कर पुलिस को बुलाया । उसके कुछ ही समय उपरांत न्यूनतम ५०० बांग्लादेशी लोगों ने उस सोसाइटी पर आक्रमण किया । इससे यह दिखाई देता है कि उनकी संख्या बहुत बढी है ।

मयंक जैन का परिचय

श्री. मयंक जैन

श्री. मयंक जैन एक प्रसिद्ध फिल्म निर्माता एवं हिन्दुत्वयोद्धा हैं । उन्होंने कुल ५० से अधिक फिल्मों की निर्मिति एवं निर्देशन किया है । इस माध्यम से उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, प्राणी संरक्षण, मानवी विकास, स्वास्थ्य आदि अनेक विषयों पर गहन कार्य किया है । नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उस समय जैन ने ‘इंडिया टुमॉरो : द गुजरात मिरैकल’ फिल्म का निर्देशन किया था । उन्होंने भारत को ध्वस्त करने के लिए प्रयासरत बांग्लादेशी घुसपैठियों के संदर्भ में ‘द बांग्ला क्रिसेंट’ नामक एक महत्त्वपूर्ण फिल्म बनाई थी । अब उसके ही अगले भाग (सिक्वल) के रूप में कुछ महिने पूर्व ही उन्होंने ‘क्रिमसन क्रिसेंट : द लास्ट क्वॉर्टर’ नामक फिल्म बनाई । इस माध्यम से उन्होंने इस्लामी विचारधारा के गहन विषय पर प्रकाश डाला है ।

२. हिन्दुओ, शौर्य का कोई विकल्प नहीं है, यह जान लो !

इन घुसपैठियों को भारत के मदरसों में प्रशिक्षण मिलता है । उनकी जनसंख्या बढ रही है तथा वे हमारे लोगों की नौकरियां छीन रहे हैं । जब वे अपने देश बांग्लादेश में होते हैं, तब वे वहां के हिन्दुओं पर आक्रमण करते हैं तथा भारत आने के उपरांत वे बहुसंख्यक हिन्दुओं पर आक्रमण करते हैं । हिन्दू वहां भी (बांग्लादेश में) मार खा रहे हैं तथा भारत में भी मार खा रहे हैं । हिन्दुओं की यदि यही स्थिति रहेगी, तो ईश्वर भी उन्हें बचा नहीं पाएंगे; इसलिए शौर्य का अन्य कोई विकल्प नहीं है । यदि आपके पास शौर्य ही नहीं है, तो भाजपा अथवा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, ऐसा कोई भी आपमें शौर्य जागृत नहीं कर सकता । उसके कारण आत्महत्या के मार्ग पर अग्रसर समाज शौर्यविहीन समाज है । वह यदि यह विचार कर रहा है कि कोई उस पर आक्रमण नहीं करेगा, तो वह चूक है । कुछ लोग धूम्रपान करते हैं । उन्हें फेफडे के कैंसर के रोगियों के आंकडे दिखाए गए, तब भी उन्हें ऐसा लगता है, ‘‘मुझे यह कैंसर होना असंभव है ।’ इसके कारण वे धूम्रपान करते रहते हैं तथा एक दिन मर जाते हैं । हिन्दू समाज की भी यही मानसिकता है; क्योंकि वे स्वयं के प्राणों पर संकट आने तक सक्रिय नहीं होते । अतः हिन्दुओं का जागृत होना अत्यंत आवश्यक है ।

हिन्दुओं को जागृत करने में ‘सनातन प्रभात’ की अहम भूमिका !

श्री. विक्रम डोंगरे को ‘क्रिमसन क्रिसेंट’ का प्रचारपत्रक भेंट देते श्री. मयंक जैन (बाईं ओर)

‘सनातन प्रभात’ प्रसारमाध्यम समूह अच्छा कार्य कर रहा है । उन्होंने जो कार्य किया है, उसके लिए मैं अत्यंत आभारी हूं । ‘सनातन प्रभात’ ने मेरे चलचित्र पर विविध भाषाओं में लेख लिखे एवं आपने उसकी ‘लिंक’ घर-घर पहुंचाई । ‘सनातन प्रभात’ ने ‘यू ट्यूब’ द्वारा मेरी भेंटवार्ता प्रसारित की । इस काम के लिए हिन्दू समाज ‘सनातन प्रभात’ का सदैव ऋणी रहेगा । हिन्दुओं में जनजागरण करने में  ‘सनातन प्रभात’ की अहम भूमिका है । सर्वत्र अंधेरा है, ऐसा नहीं है; कहीं-कहीं प्रकाश है और हमें इस प्रकाश का स्रोत ढूंढकर उसके साथ काम करना पडेगा । हिन्दू समाज के लिए वास्तव में काम करनेवालों को मंच उपलब्ध करवाना और उसे अन्य समुदायों में फैलाना, यह हमारा धर्मकर्तव्य है ।’

– श्री. मयंक जैन

३. हिन्दुओं में शत्रुबोध का अभाव

ऐसी गंभीर स्थिति में भी प्रत्येक व्यक्ति को लगता है कि ‘मैं बच जाऊंगा’ । ऐसे लोगों को इस बेहोशी से (‘कोमा’ से) बाहर निकालना होगा । इतने बडे संकट को समझ लेने के लिए किसी भी गणितीय समीकरण की आवश्यकता नहीं है । हिन्दुओं पर हो रहे आघातों के आंकडे प्रतिदिन आते रहते हैं । गोध्रा हत्याकांड में अयोध्या से आ रहे रामभक्तों को जिंदा जलाया गया । उसके उपरांत भी कुछ लोगों को ऐसा लगता होगा कि ‘हम उस गाडी में नहीं थे; इसलिए बच गए तथा भविष्य में भी हम बचेंगे’, तो यह उनकी अवधारणा है । ऐसे समाज की रक्षा करना असंभव है । शुतुरमृग को ज्ञात होता है कि अब आक्रमण होनेवाला है; इसलिए वह रेत में अपनी गर्दन छिपाए बैठा रहता है । देश के शत्रु के द्वारा आततायिता हो रही है, तब भी हिन्दू खडे नहीं रहना चाहता । हिन्दू को ऐसा लगता है, ‘मेरे पडोसी पर आक्रमण होगा; परंतु मैं बच जाऊंगा ।’ यह बेहोशी की अवस्था है, जिसे दूर करना कठिन है । ये हिंसक विचारधाराएं स्वयं ही नष्ट हुईं, तो ही हिन्दू समाज बचेगा ।

देश में बढ रहा कट्टरतावाद मैंने २० वर्ष पूर्व ‘द बांग्ला क्रिसेंट’ फिल्म में वास्तव में हो रही घटनाओं के माध्यम से दिखाया था । उसके उपरांत भी कोई सुधार नहीं हुआ है, यह स्पष्ट हुआ । सरकार ने भी आंकडे अद्यत नहीं किए हैं । उसके कारण देश में कितने बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं, यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है । ‘टास्क फोर्स’ (कृतिदल) एवं सीमा व्यवस्थापन ने न्यायालय को जो बताया, उसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के ब्योरे में घुसपैठियों की संख्या २ करोड बताई गई है । बांग्लादेशी घुसपैठिए विगत ५० वर्षाें से घुसपैठ कर रहे हैं तथा वर्तमान में भी हमारे पास उनके कोई आंकडें नहीं हैं । बांग्लादेशी घुसपैठिए विगत ५० वर्षाें से घुसपैठ कर रहे हैं तथा वर्तमान में भी हमारे पास उनके कोई आंकडें नहीं हैं ।

अब उनके बच्चों को बच्चे हो गए हैं, तो यह देशविघातक वृद्धि है । ऐसा होते हुए भी हिन्दू विश्राम कर रहे हैं । भारतीय लोग अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया इत्यादि देशों का भ्रमण करने में तथा उसके छायाचित्र प्रसारित करने में व्यस्त हैं । सभी हिन्दू ऐसे नहीं होंगे; परंतु मेरे परिचित हिन्दू ऐसे ही हैं । वर्तमान में आपातकालीन परिस्थिति है तथा इस देश की तथा समाज की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति की प्राथमिकता होनी चाहिए तथा उन्हें इस देश की रक्षा करने के अतिरिक्त अन्य कुछ नहीं करना चाहिए ।

धर्मांध उनके ‘ईश्वर’ के प्रति समर्पित हैं । उस विषय में उनमें किसी प्रकार का भ्रम नहीं है । उनमें किसी प्रकार का बौद्धिक दोष नहीं है । उनका प्रत्येक व्यक्ति लडने के लिए तैयार है । हिन्दुओं को उनसे सीखना चाहिए । स्वरक्षा के लिए अथवा देश को बचाने के लिए आतंकवाद को नष्ट करने की विश्व ने अनुमति दी है ।

– श्री. मयंक जैन

४. हिन्दुओं की शोभायात्राओं पर धर्मांधों के आक्रमण

इस्लामी विचारधारा में ‘तौहिद’ (अल्लाह एक ही है, यह विश्वास) एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण संकल्पना है । कुरान में इसका उल्लेख है । वे केवल अल्लाह पर विश्वास करते है । उनके अनुसार कोई अन्य देवता पर विश्वास करता हो, तो उसे पाठ पढाना अनिवार्य है । वही ‘आइकॉनोक्लाजम्’ (मूर्तिभंजन का) विचार जन्म लेता है, उदाहरणार्थ वर्ष २०२४ में धर्मांधों ने गणेशोत्सव के समय में एक ही दिन अनेक स्थानों पर आक्रमण किए । जब श्रीराम मंदिर आंदोलन का अंतिम चरण चल रहा था, तब भी अंजार (गुजरात), इंदौर (मध्य प्रदेश) एवं देहली में निकाली गईं शोभायात्राओं पर प्राणघातक आक्रमण हुए थे । हिन्दू संगठनों की शोभायात्राओं पर सदैव ही आक्रमण होते हैं ।

भारत में ५ करोड से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठिए !


अब तक हमने बांग्लादेशी घुसपैठियों की समस्या का समाधान नहीं किया, तब तक रोहिंग्याओं की समस्या आ पहुंची है । उनकी अनाधिकारिक संख्या १० लाख थी । अब रोहिंग्या तमिलनाडु तक पहुंच गए हैं । भारत इतना शक्तिशाली देश है । हमारे पास पुलिस बल एवं सेना है । यहां की अधिकांश जनसंख्या हिन्दू है, साथ ही यहां अनेक राष्ट्र्रवादी संगठन हैं । इतना सब होते हुए भी मानो हम बेहोश (‘कोमा’ में) होने जैसा आचरण कर रहे हैं । हम पर शस्त्रकर्म करने की आवश्यकता होते हुए भी हम ऊपर से रंगभूषा (मेकअप) करते बैठे हैं । जनता प्राथमिकताओं की आपूर्ति किए बिना, मजे में जी रही है । बाजार में लोग ग्राहकोपयोगी वस्तुएं खरीदने के पीछे पडे हैं । जिस दिन देश में गृहयुद्ध आरंभ होगा, तब हमें यह बातें दिखाई नहीं देंगी । ‘विदेशों से जो घुसपैठिए आए हैं, उन्होंने उनके देश में हिन्दुओं को इससे पहले ही मिटा दिया है ।’, यह ‘एम्नेस्टी इंटरनेशनल’ का ब्योरा है, जिसकी हमें कोई चिंता नहीं है । उन्हें विरोध करने पर आधुनिकतावादी उनके साथ खडे रहते हैं । वर्ष २००५ में सी.बी.आई. के तत्कालीन निदेशक जोगिंदर सिंह ने कहा था, ‘भारत ५ करोड से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठियों का बोझ सहन कर रहा है ।’ वे सी.बी.आई. के प्रमुख थे; इसलिए उनके इस वक्तव्य को हमें गंभीरता से लेना होगा ।

– श्री. मयंक जैन

५. हिन्दू वास्तववादी बनें !

अब पाश्चात्य विचारक अथवा तथाकथित धर्मनिरपेक्षतावादी बुद्धिजीवी कहते हैं कि वे उनके धर्मग्रंथ में दी गई भूमिका निभा रहे हैं । मुसलमानों में उनके धर्मग्रंथ के प्रति कोई शंका नहीं है; परंतु हिन्दू, साथ ही अमेरिका एवं यूरोप के ‘वोक’ (साम्यवादी) लोग उनके स्वप्नवत विचार रखने का प्रयास करते हैं । वे हिन्दुओं को वास्तविकता से दूर ले जाते हैं, उसके पश्चात आपको कुछ नहीं करना पडता । यही लडाई समाप्त हुई । इसलिए अब सो जाईए तथा जब अगली गणेश चतुर्थी आएगी, तब एक और आक्रमण झेलने के लिए तैयार रहिए । कोई भी शस्त्रकर्म करते समय रोगी को कष्ट होता ही है; परंतु शस्त्रकर्म तो करना ही पडता है ।

आपके डॉक्टर ने आपको यदि कैंसर होने की बात बताई, तो शरीर का वह अंग निकाल देना अथवा ‘केमोथेरपी’ (कैंसर का एक उपचार) करना एक उपाय है; परंतु हिन्दुओं को ऐसे विश्व में रहना है, जहां उन्हें ‘कुछ हुआ ही नहीं’, ऐसा लगे । ‘कुछ नहीं हुआ है’, यदि ऐसी धारणा बना ली, तो मादक पदार्थ का सेवन किए मनुष्य की भांति हिन्दू वास्तविकता से दूर जाते रहेंगे ।

 ६. इस्लामी जगत में परिवर्तन की लहर

इस्लामी जगत में बहुत गति से एक बुद्धिवादी क्रांति हो रही है, जो हमने हमारे ‘द क्रिमसन क्रिसेंट’ फिल्म में दिखाई है । सऊदी अरब के क्राऊन प्रिंस एम्.बी.एस्. (मोहम्मद बिन सलमान) ने ‘हदीस डॉक्युमेंटेशन सेंटर’की स्थापना की तथा उसमें उन्होंने कहा, ‘‘इस्लामी धर्मग्रंथ में जहां जहां आततायिता होगी, वहां वहां मैं उसे हटा दूंगा ।’’ उसके उपरांत ‘एम्.बी.एस्.’ने ९९ प्रतिशत हदीस हटा दिए । उसके कारण सऊदी अरब में ५ सहस्र मस्जिदें बंद की गईं ।

– श्री. मयंक जैन, प्रसिद्ध चलचित्र निर्माता एवं निर्देशक, देहली.