श्रीमद् विद्याधीश तीर्थ श्रीपाद वडेर स्वामीजी ने किया सनातन आश्रम का मंगलमय अवलोकन !

रामनाथी (गोवा) – ‘रामरूपी रामरंगी । दर्शन का यही अवसर । दर्शन का यही अवसर ।।’ सनातन संस्था के आस्था केंद्र प.पू. भक्तराज महाराज की इन भजनपंक्तियों का सनातन आश्रम के साधकों ने ‘इसी देह इसी नेत्र’ से अनुभव किया । गोवा के अतिप्राचीन (५५० वर्ष प्राचीन) श्री संस्थान गोकर्ण पुर्तगाली जीवोत्तम मठ के २४ वें पू. पीठाधिपति तथा श्रीराम के नि:स्सीम भक्त श्रीमद् विद्याधीश तीर्थ श्रीपाद वडेर स्वामीजी का आश्रम को मंगलमय चरणस्पर्श हुआ ।

इस मंगल अवसर पर सनातन के संत पू. पृथ्वीराज हजारेजी ने पू. स्वामीजी का भावपूर्ण स्वागत किया । पू. स्वामीजी ने अत्यंत आस्था से एवं जिज्ञासा से आश्रम के द्वारा चल रहा धर्मप्रसार का कार्य जान लिया । आश्रम के अवलोकन के उपरांत पू. स्वामीजी ने साधकों को ईशभक्ति का महत्त्व विशद करते हुए अमूल्य मार्गदर्शन किया । पू. स्वामीजी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के घर में रामराज्य की स्थापना होनी चाहिए । ऐसा होने से सभी राज्यों में एवं पूरे देश में रामराज्य की स्थापना होगी ।
Param Pujya Shrimad Vidyadhish Teertha Shripad Vader Swamiji, the 24th Peethadhipati of Shri Sansthan Gokarna Partagali Jeevottam Math, graciously visited the Sanatan Sanstha Ashram at #Ramnathi, #Goa. His divine arrival filled the Ashram with spiritual joy and auspiciousness.… pic.twitter.com/0cMUVfNdRT
— Sanatan Sanstha (@SanatanSanstha) February 17, 2026
सनातन आश्रम में कुछ ऐसे हुआ पू. स्वामीजी का दर्शन समारोह !

१. सनातन संस्था के व्यवस्थापकीय न्यासी श्री. वीरेंद्र मराठे ने श्री रामनाथ देवस्थान में स्थित मठ पर जाकर पू. स्वामीजी को आश्रम के अवलोकन हेतु पधारने की प्रार्थना की ।
🙏 With profound reverence, Shri Virendra Marathe, Managing Trustee, Sanatan Sanstha, was blessed with the divine opportunity to meet His Holiness the 24th Peethadhipati of Shri Sansthan Gokarna Partagali Jeevottam Math, Param Pujya Shrimad Vidyadhish Teertha Shripad Vader… pic.twitter.com/JmiDBGbHX3
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२. १७ फरवरी की सायंकाल के मंगलमय वातावरण में आश्रम के प्रवेशद्वार के दोनों ओर खडे साधकों ने पू. स्वामीजी का स्वागत किया । सनातन के साधक श्री. गिरिजय प्रभुदेसाई ने पू. स्वामीजी का पाद्यपूजन किया ।
३. इसके पश्चात सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस एवं सनातन के साधक श्री. निषाद देशमुख ने पू. स्वामीजी को आश्रम में चल रहे राष्ट्र एवं धर्मप्रसार के कार्य के विषय में अवगत किया । पू. स्वामीजी ने अत्यंत आत्मीयता से तथा जिज्ञासा के साथ सनातन संस्था के प्रसारकार्य का विषय जान लिया ।

४. पू. स्वामीजी ने साधना के विषय में साधकों का अमूल्य मार्गदर्शन किया । उन्होंने अपने करकमलों से उपस्थित साधकों को प्रसाद दिया । इस समारोह में भारताचार्य पू. (प्रा.) सु.ग. शेवडेजी की भी वंदनीय उपस्थिति थी ।
५. पू. स्वामीजी के साथ श्री रामनाथ देवस्थान समिति के अध्यक्ष श्री. वल्लभ कुंकळ्ळीकर, समिति के विधि सलाहकार अधिवक्ता राजेश तळावलीकर, समिति के सदस्य श्री. संजीव बाले एवं श्री. रुद्र कापडी, साथ ही श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाळी जीवोत्तम मठ के गुरुजी श्री. संतोष आचार्य एवं श्री. वसंत आचार्य उपस्थित थे ।
पू. स्वामीजी ने सूक्ष्मता के साथ ‘सनातन प्रभात’का कार्य जान लिया !![]() पू. स्वामीजी ने ‘सनातन प्रभात’ प्रसारमाध्यम समूह के कार्य के विषय में सभी जानकारी विस्तार से एवं जिज्ञासा से जानकर ली । नियतकालिक ‘सनातन प्रभात’ किन किन भाषाओं में प्रकाशित होता है, उसकी छपाई, वितरण; साथ ही साधक किसप्रकार निःस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं आदि सूत्र उन्होंने जान कर साधकों को आशीर्वाद दिया । ‘सनातन प्रभात’के समूह संपादक श्री. योगेश जलतारे, साथ ही कन्नड ‘सनातन प्रभात’के उपसंपादक श्री. प्रशांत हरिहर के साथ भी पू. स्वामीजी ने संवाद किया ।
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भावपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ सम्मान समारोह !
आश्रमदर्शन के उपरांत स्वामीजी ने साधकों का मार्गदर्शन किया । इस समय सनातन की साधक दंपति डॉ. पांडुरंग मराठे एवं श्रीमती मंगला पांडुरंग मराठे ने वेदमंत्रों के उच्चारण से पू. स्वामीजी के गुरु तथा श्री संस्थान गोकर्ण पुर्तगाली जीवोत्तम मठ के २३ वें पू. पीठाधिपती श्रीमद् विद्याधिराज तीर्थ स्वामीजी की पादुकों का धर्मशास्त्रीय पद्धति से पूजन किया ।
Shri. Pandurang Marathe and Smt. Mangala Marathe performed the sacred Paduka Pujan (worship) of Param Pujya Shrimad Vidyadhiraj Teertha Shripad Vader Swamiji, the revered Guru of Param Pujya Shrimad Vidyadhish Teertha Shripad Vader Swamiji, the 24th Peethadhipati of Shri Sansthan… pic.twitter.com/aKTUpXHLnt
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इसके साथ ही श्रीमद् विद्याधीश तीर्थ श्रीपाद वडेर स्वामीजी की पंचारती उतारी । इसके उपरांत सनातन के संत पू. पृथ्वीराज हजारेजी ने यांनी श्रीमद् विद्याधीश तीर्थ श्रीपाद वडेर स्वामीजी का भावपूर्ण सम्मान किया, साथ ही उन्होंने श्री रामनाथ देवस्थान के सभी पदाधिकारियों का भी श्रीफल एवं भेंटवस्तु प्रदान कर सम्मान किया । इस अवसर पर स्वामीजी ने उपस्थित साधकों का मार्गदर्शन कर प्रत्येक साधक को आशीर्वाद दिया।
सनातन संस्था समाज में जागृति लाने का महत्त्कार्य कर रही है ! – श्रीमद् विद्याधीश तीर्थ श्रीपाद वडेर स्वामीजी का आशीर्वचन![]() पू. स्वामीजी ने साधकों को आशीर्वचन देते हुए कहा,१. सनातन संस्था धर्मप्रसार के लिए प्रतिबद्ध ! सनातन संस्था धर्मप्रसार के लिए प्रतिबद्ध है । इसके कारण जीवन में संतुष्टि आती है । जीवन दो प्रकार से व्यतीत किया जा सकता है । एक है स्वयं को आनंद देकर तथा दूसरा है अन्यों को आनंद देकर । सनातना धर्म हमें अन्यों को आनंद देने हेतु प्रयासरत रहने की सीख देता है । सनातन संस्था समाज में जागृति लाने का महत्कार्य कर रही है तथा समाज में आनंद फैलाने हेतु प्रयास कर रही है । २. अन्यों को आनंद देने हेतु प्रयासरत रहें ! एक बोधप्रद कथा के माध्यम से पू. स्वामीजी ने ‘अन्यों का विचार कैसे करना चाहिए ?’, इस संदर्भ में विवेचन किया । इससे पू. स्वामीजी ने ‘हमें अन्यों का विचार करना चाहिए तथा अन्यों का आनंद देने हेतु हमें प्रयासरत रहना चाहिए, ऐसा बताते हुए स्वयं के नाम के लिए न जिएं, अपितु अन्यों के लिए जीवन जिएं’, यह संदेश भी दिया । ३. भगवद्भक्त को कोई कष्ट नहीं पहुंचा सकता ! लौकिकदृष्टि से यदि किसी व्यक्ति का जिलाधिकारी अथवा पुलिस प्रमुख से परिचय हो, तो उस व्यक्ति को कोई भी कष्ट नहीं पहुंचाता । उसीप्रकार से यदि साधक ईश्वर की भक्ति करता हो, तो कोई ऐसे साधक को कष्ट पहुंचाने का साहस नहीं दिखाता तथा यदि किसी ने साधक को कष्ट पहुंचाया तथा उस साधक ने ईश्वर से ‘आप मेरी रक्षा करें’, यह प्रार्थना की, तो ईश्वर उसकी रक्षा करते हुए उसका अहित करनेवालो को भी दंडित करता है । उसके कारण ही भगवद्भक्त को कोई कष्ट नहीं पहुंचाता । अन्य एक कथा का सुंदर विवेचन करते हुए पू. स्वामीजी ने ‘साधकों ने स्वयं में ईश्वरभक्ति बढाई, तो ईश्वर हमारी रक्षा करते हैं’, यह वचन साधकों के मन पर अंकित किया ।
४. साधको, ईश्वर के चरणों के प्रति आसक्ति बढाएं ! साधक ईश्वर के निकट बने रहने का निरंतर प्रयास करें तथा वे ईश्वर के चरणों के प्रति आसक्ति बढाएं । ईश्वर के प्रति मनोभाव जागृत होने से जीवन की समस्याओं का समाधान होता है । इसके साथ ही इसके कारण अन्यों में हमारे प्रति सकारात्मकता भी बढती है । साधकों पर ईश्वर के कृपाशिर्वाद निरंतर बना रहे, उनके कष्ट दूर हों; यह मैं श्रीराम एवं श्री वीरविठ्ठल के चरणों में प्रार्थना करता हूं । |
क्षणिकाएं
१. श्रीमद् विद्याधीश तीर्थ श्रीपाद वडेर स्वामीजी का आश्रम में आगमन होने से पूर्व आश्रम के ध्वनियंत्र पर प्रभु श्रीराम पर आधारित भजन चलाए जा रहे थे, जिससे आश्रम का संपूर्ण परिसर राममय बन गया था ।
२. पू. स्वामीजी का भावपूर्ण स्वागत करनेवाला स्वागत फलक सभी के आकर्षण का केंद्र बना था ।
३. आश्रम को रंगोलियां बनाकर सुशोभित किया गया था ।
कुछ ही दिन पूर्व श्री संस्थान गोकर्ण पुर्तगाली जीवोत्तम मठ को ५५० वर्ष हुए पूरे !कुछ ही दिन पूर्व श्री संस्थान गोकर्ण पर पुर्तगाली जीवोत्तम मठ को ५५० वर्ष पूरे हुए हैं । इस उपलक्ष्य में २८ नवंबर २०२५ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शुभहस्तों से मठ के परिसर में श्रीराम की ७७ फीट ऊंची कांस्य धातु से बनी भव्य मूर्ति का अनावरण किया गया था । इस कार्यक्रम में गोवा, महाराष्ट्र, कर्नाटक तथा अन्य स्थानों से आए सहस्रों भक्त उपस्थित थे ।
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