
धनबाद (झारखंड) – मकर संक्रांति से रथसप्तमी तक का काल ‘पर्वकाल’ होता है । इस ‘पर्वकाल’ में किए दान एवं पुण्यकर्म विशेष फलदायी होते हैं । दान सदैव ‘पात्रे दानम्’ अर्थात, ‘सत्पात्रे दानम् (योग्य व्यक्ति को दान)’ होना चाहिए । इस संसार में संतों से अधिक सत्पात्र कोई नहीं है, इसलिए जो कुछ दान करना हो, उन्हें ही अर्पण करें ।
इस संदर्भ में सनातन संस्था की ओर से धनबाद के ‘आपनो घर’ सोसायटी में प्रवचन तथा धर्मदान अभियान का आयोजन किया गया । इस अवसर पर सोसायटी के सचिव श्री. देवेन्द्र कुमार पिलानियाजी से मिलना हुआ । वे सनातन प्रभात के सदस्य बने । उन्होंने अपार्टमेंट से अर्पण लेने की तथा माह में एक बार ग्रंथ प्रदर्शनी लगाने एवं प्रवचन लेने की भी अनुमति दी ।
कौवाबांध मंदिर, बरमसिया शिव मंदिर एवं कतरास के रानी बाजार में आयोजित प्रवचनों में श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया गया । सनातन संस्था की ओर से उत्तर प्रदेश तथा बिहार के विविध जिलों में ऑनलाइन विशेष प्रवचन का आयोजन किया गया । सैकडों जिज्ञासुओं ने ऑनलाइन जुडकर प्रवचन का लाभ लिया । अनेक जिज्ञासुओं ने इस प्रकार के कार्यक्रम रखने की इच्छा दर्शाई ।
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