
धनबाद (झारखंड) – मकर संक्रांति से रथसप्तमी तक का काल ‘पर्वकाल’ होता है । इस ‘पर्वकाल’ में किए दान एवं पुण्यकर्म विशेष फलदायी होते हैं । दान सदैव ‘पात्रे दानम्’ अर्थात, ‘सत्पात्रे दानम् (योग्य व्यक्ति को दान)’ होना चाहिए । इस संसार में संतों से अधिक सत्पात्र कोई नहीं है, इसलिए जो कुछ दान करना हो, उन्हें ही अर्पण करें ।
इस संदर्भ में सनातन संस्था की ओर से धनबाद के ‘आपनो घर’ सोसायटी में प्रवचन तथा धर्मदान अभियान का आयोजन किया गया । इस अवसर पर सोसायटी के सचिव श्री. देवेन्द्र कुमार पिलानियाजी से मिलना हुआ । वे सनातन प्रभात के सदस्य बने । उन्होंने अपार्टमेंट से अर्पण लेने की तथा माह में एक बार ग्रंथ प्रदर्शनी लगाने एवं प्रवचन लेने की भी अनुमति दी ।
कौवाबांध मंदिर, बरमसिया शिव मंदिर एवं कतरास के रानी बाजार में आयोजित प्रवचनों में श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया गया । सनातन संस्था की ओर से उत्तर प्रदेश तथा बिहार के विविध जिलों में ऑनलाइन विशेष प्रवचन का आयोजन किया गया । सैकडों जिज्ञासुओं ने ऑनलाइन जुडकर प्रवचन का लाभ लिया । अनेक जिज्ञासुओं ने इस प्रकार के कार्यक्रम रखने की इच्छा दर्शाई ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?