मकर संक्राति के निमित्त झारखंड, उत्तर प्रदेश तथा बिहार में प्रवचन के माध्यम से धर्मप्रसार !
मकर संक्रांति से रथसप्तमी तक का काल ‘पर्वकाल’ होता है । इस ‘पर्वकाल’ में किए दान एवं पुण्यकर्म विशेष फलदायी होते हैं ।
मकर संक्रांति से रथसप्तमी तक का काल ‘पर्वकाल’ होता है । इस ‘पर्वकाल’ में किए दान एवं पुण्यकर्म विशेष फलदायी होते हैं ।
मकर संक्रांति और वसंत ऋतु के दौरान हिंदुओं को पतंग उड़ाने की अनुमति नहीं होगी ! भारत से इस प्रकार की बातों का उत्तर देना अब आवश्यक हो गया है !
। पुदुक्कोट्टई और शिवगंगाई में २ बैलों की मृत्यु हुई । मरने वालों में अधिकतर लोग इस खेल में सम्मिलित नहीं थे; वे या तो बैल मालिक थे अथवा दर्शक । इस उत्सव में बैल को लोगों की भीड़ में दौड़ाया जाता है ।
‘मकर संक्रांति पर सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक पुण्यकाल रहता है । इस काल में तीर्थस्नान का विशेष महत्त्व है । गंगा, यमुना, गोदावरी, कृष्णा एवं कावेरी नदियों के किनारे स्थित क्षेत्र में स्नान करनेवाले को महापुण्य का लाभ मिलता है ।’
इस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक वातावरण अधिक चैतन्यमय होता है । साधना करनेवाले को इस चैतन्य का लाभ होता है ।
चंदौसी में दिनांक १६ जनवरी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने मकर संक्राति निमित्त कार्यक्रम का आयोजन किया था । इसमें सनातन संस्था की ग्रंथ-प्रदर्शनी का लाभ अनेक जिज्ञासु ने लिया ।
कोलार (कर्नाटक) में कोडी मठ के स्वामी डॉ. शिवानंद शिवयोगी की भविष्यवाणी