मकर संक्राति के निमित्त झारखंड, उत्तर प्रदेश तथा बिहार में प्रवचन के माध्यम से धर्मप्रसार !

मकर संक्रांति से रथसप्तमी तक का काल ‘पर्वकाल’ होता है । इस ‘पर्वकाल’ में किए दान एवं पुण्यकर्म विशेष फलदायी होते हैं ।

मकर संक्रांति

१४ जनवरी २०२६ (माघ कृष्ण ११) मकर संक्रांति त्योहार मनाने की पद्धति..

Kite Ban In Pakistan : लाहौर (पाकिस्तान) में इस्लाम-विरोधी मानकर पतंगबाजी पर प्रतिबंध

मकर संक्रांति और वसंत ऋतु के दौरान हिंदुओं को पतंग उड़ाने की अनुमति नहीं होगी ! भारत से इस प्रकार की बातों का उत्तर देना अब आवश्यक हो गया है !

Jallikattu Tragedy : तमिलनाडु में आयोजित ‘जल्लीकट्टू’ क्रीड़ा में ७ लोगों की मृत्यु और ४०० लोग घायल ।

। पुदुक्कोट्टई और शिवगंगाई में २ बैलों की मृत्यु हुई । मरने वालों में अधिकतर लोग इस खेल में सम्मिलित नहीं थे; वे या तो बैल मालिक थे अथवा दर्शक । इस उत्सव में बैल को लोगों की भीड़ में दौड़ाया जाता है ।

मकर संक्रांति मनाने की पद्धति एवं पर्वकाल में दान का महत्त्व

‘मकर संक्रांति पर सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक पुण्यकाल रहता है । इस काल में तीर्थस्नान का विशेष महत्त्व है । गंगा, यमुना, गोदावरी, कृष्णा एवं कावेरी नदियों के किनारे स्थित क्षेत्र में स्नान करनेवाले को महापुण्य का लाभ मिलता है ।’

मकर संक्रांति मनाने की पद्धति एवं पर्वकाल में दान का महत्त्व

इस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक वातावरण अधिक चैतन्यमय होता है । साधना करनेवाले को इस चैतन्य का लाभ होता है ।

हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा उत्तर भारत में ‘मकर संक्रांति’ विषय पर ‘ऑनलाइन’ प्रवचन संपन्न !

चंदौसी में दिनांक १६ जनवरी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने मकर संक्राति निमित्त कार्यक्रम का आयोजन किया था । इसमें सनातन संस्था की ग्रंथ-प्रदर्शनी का लाभ अनेक जिज्ञासु ने लिया ।