सभी पाठकों, शुभचिंतकों एवं धर्मप्रेमियों से विनम्र निवेदन

‘अध्यात्मशास्त्र आचरण में लाकर मानवजाति का कल्याण हो’, इस उद्देश्य से सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी ने अध्यात्म, साधना, देवताओं की उपासना, संस्कृति का पालन, आध्यात्मिक स्तर के उपचार, ईश्वरप्राप्ति के लिए कला, साथ ही राष्ट्ररक्षा, धर्मजागृति और हिन्दू राष्ट्र जैसे विविध विषयों पर ३६९ ग्रंथों का संकलन किया है । नवंबर २०२५ तक सनातन ने १३ भाषाओं में ग्रंथों की १ करोड १ लाख ७१ हजार प्रतियां प्रकाशित की हैं । अध्यात्मशास्त्र के प्रचार के लिए इन ग्रंथों की प्रदर्शनियां पूरे भारत में अनेक स्थानों पर नियमित रूप से लगाई जाती हैं ।

आप भी निम्नलिखित अवसरों पर सनातन के ग्रंथों की प्रदर्शनी आयोजित कर इस अध्यात्मप्रसार के कार्य में सहभागी हो सकते हैं :
१. अपने परिसर के अथवा आप जिनसे जुडे हैं, ऐसे मंदिरों के त्योहार, उत्सव एवं यात्रा,
२. विवाह, उपनयन संस्कार, जन्मदिन जैसे पारिवारिक कार्यक्रम,
३. राष्ट्र एवं धर्म से संबंधित उपक्रम,
४. कीर्तन, प्रवचन, व्याख्यान अथवा सभाओं आदि में,
५. अपने क्षेत्र में होनेवाले पुस्तक मेलों (Book Fairs) में ।
आप भी ऐसी ग्रंथ-प्रदर्शनी आयोजित करना चाहते हैं, तो इसके लिए अपने जिले के सनातन संस्था के साधकों से संपर्क कर सकते हैं । आपकी मांग के अनुसार सनातन संस्था के साधक उस स्थान पर ग्रंथ-प्रदर्शनी आयोजित कर सकते हैं । आपके द्वारा ऐसी प्रदर्शनियां आयोजित करने से सनातन धर्म के अध्यात्म का व्यापक प्रचार-प्रसार होगा !
– श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळ
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?