सातारा में २२ सहस्र मतदाताओं के नाम दोहराए गए ! – संतोष पाटील, जिलाधिकारी

सातारा, १५ जनवरी (वार्ता) – सातारा जिले में २२ सहस्त्र मतदाताओं के नाम दो बार प्रविष्ट होने का प्रकरण सामने आया है । १ जुलाई २०२५ की मतदाता सूची को जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के लिए मान्य किया जाएगा, यह जानकारी जिलाधिकारी संतोष पाटील ने पत्रकार परिषद में दी । राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार दोहरे मतदाताओं की सूची की जांच पूरी कर ली गई है ।

जिलाधिकारी ने कहा, “चुनाव के लिए ईवीएम यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं । आदर्श आचार संहिता का कठोरता से पालन सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर बैठकें की गई हैं । राजनीतिक दलों को चुनाव नियमावली की जानकारी दी जाएगी । चुनाव कार्यों के लिए ‘एक खिडकी सेवा’ प्रारंभ की जाएगी ।”

पुणे में ई.वी.एम. यंत्रों में बिगाड : यंत्र में लाइट नहीं जली, मशीन का समय ४ मिनट आगे किया गया !

यहां ई.वी.एम. यंत्रों में बिगाड आने से मतदान प्रक्रिया में संदेह का वातावरण निर्माण हो गया है, ऐसा आरोप राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार गुट) के वरिष्ठ नेता अंकुश काकडे ने लगाया । काकडे ने आरोप किया कि मतदान केंद्रों पर उपस्थित अधिकारियों ने इस संबंध में संतोषजनक उत्तर नहीं दिए ।

बहुसदस्यीय प्रभाग प्रणाली में ४ उम्मीदवारों को मत देना होता है । इनमें ३ उम्मीदवारों को मत देने के उपरांत चौथे मतदान के समय मशीन पर लाइट नहीं जली । इससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि वोट डाला या नहीं । मशीन में समय १४ मिनट आगे दिख रहा था । जब वास्तविक समय ७.३० बजे था, तब मशीन में ७.४४ बजे दिखाई दे रहा था।

धायरी (पुणे) में उंगली की स्याही पोंछने वाले की पिटाई !

धायरी के एक मतदान केंद्र पर मतदान की स्याही पोंछने वाले व्यक्ति की पिटाई की गई ।

जलगांव में निर्दलीय उम्मीदवार द्वारा नकली मतदान किया जाना हुआ उजागर

जलगांव नगर के प्रभाग ‘५ अ’ स्थित आर.आर. विद्यालय के मतदान केंद्र पर निर्दलीय उम्मीदवार पीयूष पाटिल ने सतर्कता दिखाते हुए नकली मतदान के प्रयास को विफल किया । पाटील के प्रतिस्पर्धी शिवसेना के जिला प्रमुख विष्णु भंगाले हैं । पंक्ति में खडे कुछ लोगों की गतिविधियां संदिग्ध लगने पर उम्मीदवार पाटिल ने मतदान केंद्र प्रमुख को सूचित किया । जांच करने पर संदिग्धों के पास कोई आधिकारिक पहचान पत्र नहीं मिला । इसके उपरांत कर्तव्य पर नियुक्त पुलिस ने उन्हें बाहर निकाल दिया ।

संपादकीय भूमिका 

इतनी बडी संख्या में दोहरे नाम होने की बात प्रशासन को समय रहते क्यों नहीं ध्यान में आई ?